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जिस देश को तरक्की करनी होती है वह किसी को पिछड़ा घोषित नहीं करता : आईएएस शर्मा

– सपाक्स केवल पदोन्नति में आरक्षण के विरोध का संग्राम नहीं है ये राष्ट्र की मुक्ति का यज्ञ है
– सपाक्स के जिला सम्मेलन में आर्थिक आधार पर आरक्षण सहित संविधान के विरूद्ध पदोन्नति में आरक्षण को लेकर मुखर हुए लोग

शिवपुरी। हमारे चुने हुए लोग ही हम पर जुल्म ढाह रहे हैं। अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए लोगों को अलग-अलग जातियों में बांटकर देश की राजनीति ने जो फैसला लिया वह अंग्रेजों से भी बदतर है। राजनीति ने कभी सपना नहीं देखा कि पुरुषार्थ का उपयोग करें। जिस देश को तरक्की करनी होती है वह किसी को पिछड़ा घोषित न हीं करता। सपाक्स केवल पदोन्नति में आरक्षण का संग्राम नहीं है, ये राष्ट्र की मुक्ति का महायज्ञ है। यह बात प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव शर्मा ने रविवार की देर शाम स्थानीय लालकोठी विवाह घर में आयोजित सपाक्स के जिला सम्मेलन को मुख्य अतिथि की हैसियत से संबोधित करते हुए कही। 
शर्मा ने बिना किसी राजनीतिक दल का नाम लिए कहा कि स्वार्थ के लिए राजनीति ने हमेशा से संविधान से परे जाकर भी पैरवी की है, अब समय आ गया है कि सपाक्स समाज घर-घर और गांव-गांव जाकर देश को टूटने से बचाने के लिए सपाक्स को संगठित करे और लोगों को जोड़े। 
ये पीढिय़ों की लड़ाई है : तोमर
सपाक्स के प्रांताध्यक्ष डॉ. केएस तोमर ने बताया कि किस तरह संविधान के विरुद्ध पदोन्नति में आरक्षण से एक वर्ग विशेष को उपकृत किया जा रहा है। सपाक्स के सीनियर अधिकारियों से उस वर्ग के कनिष्ठ अधिकारी इस व्यवस्था के लाभ के जरिए लगातार ऊंचे पदों पर पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये लड़ाई वर्तमान की नहीं है बल्कि हमारी आने वाली पीढिय़ों की लड़ाई है। सपाक्स समाज के प्रांताध्यक्ष इंजीनियर पीएस परिहार ने कहा कि सपाक्स एक सोच है, एक विचारधारा है, सीएम ने सिर्फ एक वर्ग विशेष को साधने के लिए उनके मंच पर जाकर खुलेआम कहा कि मेरे होते हुए कोई माई का लाल पदोन्नति में आरक्षण को समाप्त नहीं कर सकता। ऐसे में सीएम ने लोगों का नहीं बल्कि जननी का भी अपमान किया है। इस देश का दुर्भाग्य है कि सीएम हाईकोर्ट के और प्रधानमंत्री सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं मानते। सपाक्स युवा समाज के प्रसंग परिहार ने भी युवाओं का आव्हान किया कि इस महत्वपूर्ण लड़ाई में वे अपना पुरजोर योगदान दें। 
सपाक्स को हल्के में लेने की भूल न करें सरकारें
कार्यक्रम को सपाक्स के जिला मीडिया प्रभारी नीरज सरैया ने भी संबोधित किया और कहा कि ये दुर्भाग्य है कि संविधान के खिलाफ पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था का न केवल सरकार सपोर्ट कर रही है बल्कि सरकारी खर्चे से वर्ग विशेष के लिए न्यायालय में वकील तैनात किए जा रहे हैं। अब सपाक्स समाज संगठित हो गया है। इसे नजर अंदाज करने की भूल सरकारें न करें। वर्ग विशेष की भी एक क्रीमी लेयर अपने स्वार्थ के लिए राजनीति के साथ मिलकर इस वर्ग के गरीब लोगों का लंबे समय से  उपयोग कर रही है, जबकि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए ताकि वास्तव में समानता आ सके। सरैया ने हाल ही में हुए कोलारस और मुंगावली उपचुनाव में भी सपाक्स के शक्ति प्रदर्शन और अपनी प्रभावी उपस्थिति को लेकर सपाक्सजनों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम को राकेश शर्मा, सुरेश दुबे, गोविंद अवस्थी, डॉ. कौशल गौतम आदि ने भी संबोधित किया। वहीं लेखक एवं विचारक अजय खैमरिया ने भी अपनी बात रखी। इस अवसर पर सपाक्स के नोडल अधिकारी मनोज निगम, इंजीनियर ओम हरि शर्मा, महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष राज शर्मा, वंदना शर्मा, ऐश्वर्य शर्मा, स्नेह रघुवंशी, प्रदीप अवस्थी, बृजेन्द्र भार्गव, विपिन पचौरी, मनोज पाठक, जितेन्द्र व्यास, अवधेशसिंह तोमर, ओपी पांडे, धीरज वर्मा, सहित विभिन्न विभागों के सपाक्स वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन बीआरसीसी अंगदसिंह तोमर ने किया जबकि आभार प्रदर्शन महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष राज शर्मा और सपाक्स के जिलाध्यक्ष डॉ. कौशल गौतम ने किया।
सिंह सपाक्स समाज तो रघुवंशी युवा संगठन के जिलाध्यक्ष घोषित
सम्मेलन में न्यायालयीन लड़ाई के लिए शिवपुरी सपाक्स विंग ने 1 लाख रुपए की राशि का चैक प्रांतीय पदाधिकारियों को सौंपा। इस दौरान हाल ही में सेवा निवृत्त हुए सिंचाई विभाग के कार्यपालन यंत्री आरएन सिंह को सम्मानित किया गया और उन्हें सपाक्स समाज का जिलाध्यक्ष भी घोषित किया गया। वहीं सपाक्स युवा संगठन की कमान अंकित रघुवंशी अटरूनी को सौंपी गई, जबकि सुदर्शन पाठक को जिला संयोजक बनाया गया।
बंजर जमीन में हमें फसल तैयार करनी है
सपाक्स के प्रांतीय संरक्षक आईएएस शर्मा ने कहा कि कुछ कम अक्ल के लोग आरोप लगाते हैं कि सवर्ण वर्ग ने उनका शोषण किया है और प्राचीन काल से ही अन्यायपूर्ण व्यवस्था को जन्म दिया गया। पर ये हकीकत नहीं है। हमारे वेदों और ग्रंथों को लिखने वालों ने भी सर्वे भवन्तु: सुखिन: की बात की। ऐसे में उनकी सोच गलत कैसे थी उन लोगों ने तो सभी के सुखी होने की कामना की न कि किसी वर्ग विशेष की। हमें अब सजग होकर बंजर जमीन पर फसल तैयार करने की चुनौती स्वीकार करनी होगी। वरना हमारी आने वाली पीढिय़ां हमें माफ नहीं करेंगी। संयम के साथ इस लड़ाई का लडऩा होगा। 
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