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नपाध्यक्ष की बढ़ती मुश्किलें, सांसद सिंधिया के कार्यक्रमों नहीं मिली तबज्जो, भाजपा अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में

विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही कांग्रेस ने भी नपाध्यक्ष से पल्ला झाडऩा शुरू किया

शिवपुरी। कांग्रेस के नगर पालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह इन दिनों गहन संकट के दौर से गुजर रहें हैं। विधानसभा चुनाव की आहट के साथ उनके दल कांग्रेस ने भी उनसे पल्ला झाडऩा शुरू कर दिया है। वहीं भाजपा उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। जिसका तानाबाना यशोधरा राजे के निर्देश पर भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील रघुवंशी द्वारा बुना जा रहा है। कांग्रेस ने भी उनकी खराब छवि के कारण विधानसभा चुनाव को देखते हुए नपाध्यक्ष कुशवाह से दूरी बनाना शुरू कर दी है। सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के तीन दिन पहले शहर में हुए दो प्रमुख कार्यक्रमों में नपाध्यक्ष कुशवाह की जमकर उपेक्षा की गई। उन्हें मंच पर तो चढने नहीं दिया गया। वहीं उन्हें सिंधिया को माला पहनाने के लिए आमंत्रित भी नहीं किया गया। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि भाजपा द्वारा कथित रूप से अध्यक्ष के खिलाफ लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव को कुछ कांग्रेसी पार्षदों का भी समर्थन मिल रहा है। 
नगर पालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह का कार्यकाल 4 वर्ष का पूर्ण हो चुका है। लेकिन उनका यह कार्यकाल निष्क्रियता और भ्रष्टाचार के लिए याद रखा जाएगा। उनके कार्यकाल में शहर में विकास के कोई काम नहीं हुए बल्कि नगर पालिका की समस्याओं से जनजीवन आक्रंात रहा। यहां तक की स्वीकृत सड़के भी नपाध्यक्ष कुशवाह नहीं बनवा पाए और उनके कार्यकाल में ङ्क्षसंध का पानी सिंध जलावर्धन योजना की खराब गुणवत्ता के कारण घर-घर तक नहीं पहुंच पाया। यहां तक की श्री कुशवाह अपने वार्ड की समस्याओं का भी कोई निदान नहीं कर पाए और उनकी रूचि विकास कार्यो के स्थान पर नगर पालिका के संसाधनों के दोहन की रही। 4 साल पहले हुए चुनाव में शहर की जनता ने मुन्नालाल कुशवाह को विजयी बनवाया था। जबकि उनके खिलाफ यशोधरा राजे सिंधिया ने प्रचार कर भाजपा प्रत्याशी हरीओम राठौर के लिए वोट मांगे थे। अध्यक्ष पद पर भले ही मुन्नालाल कुशवाह चुनाव जीते लेकिन जनता ने पार्षदों के चयन मेंं भाजपा को बढ़त दी। 39 पार्षदों मेें से 21 पार्षद भाजपा के चुनाव चिन्ह पर जीते। जबकि भाजपा के तीन पार्षद निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए। इस तरह से 39 पार्षदों में से 24 भाजपा के समर्थक हैं। इसके बावजूद उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस के अन्नी शर्मा ने भाजपा उम्मीदवार भानू दुबे को पराजित किया। परिषद में कुछ भाजपाई पार्षद निहित स्वार्थो के कारण मुन्नालाल कुशवाह का समर्थन करते रहे। लेकिन नपाध्यक्ष कुशवाह ने अपनी ताकत का इस्तेमाल शहर की जनसमस्याओं को हल करने के स्थान पर न करते हुए अपने निजी हितों को प्राथमिकता दी। नगर पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी उनका नियंत्रण नहीं रहा और नपा उपाध्यक्ष अन्नी शर्मा से उनका अक्सर टकराव होता रहा। श्री कुशवाह पर जब भ्रष्टाचार का आरोप लगा तो पार्षद पति अनिल बघेल ने उन्हें चुनौती दी कि यदि वह पाक साफ है तो वह राजेश्वरी मंदिर में जाकर भ्रष्टाचार न करने की सौगंध खाएं। श्री कुशवाह ने कसम खाई लेकिन इसके बाद भी उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगातार लगते रहे। श्री कुशवाह के कार्यकाल मेें कोई भी ऐसी उपलब्धि नहीं है जिसे गिनाया जा सके। शहर की प्रमुख 5 सडके उनके कार्यकाल में नहीं बन पाई और कोर्ट रोड़ जोकि नगर की जीवन रेखा कहलाई जाती है उसकी दुर्दशा उनके निष्क्रिय कार्यकाल की कहानी खुद बखान करती है। श्री कुशवाह बीपीएल राशन कार्ड रखने के आरोप में गिरफ्तार भी हो चुके हैं। शहर की दुर्दशा के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है और कांग्रेस को खतरा है कि यदि नगर पालिका चुनाव में मुन्नालाल कुशवाह को साथ रखा गया तो कांग्रेस जीतने की बात तो छोडि़ए शायद जमानत भी न बचा पाए। वहीं भाजपा ने भी उनके खिलाफ पूरी ताकत से मोर्चा खोल दिया है और यशोधरा राजे ने अपने पार्षदों को निर्देश दिया है कि अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें हटाने की तैयारी की जाए। सूत्र बताते हैं कि कुछ कांगे्रसी पार्षदों ने यशोधरा राजे से मिलकर अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने का उन्हें आश्वासन दिया है। कांग्रेसी पार्षद आकाश शर्मा ने तो पहले से ही नपाध्यक्ष कुशवाह के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। हद तो तब हुई जब सिंधिया के शिवपुरी कार्यक्रम में शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धार्थ लढ़ा और पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने सांसद के स्वागत में कार्यक्रम आयोजित किए लेकिन दोनों कार्यक्रमों से मुन्नालाल कुशवाह को दूर रखा गया। चर्चा है कि विधानसभा चुनाव में राकेश गुप्ता या सिद्धार्थ लढ़ा में से कोई एक कांग्रेस का उम्मीदवार हो सकता है। ऐसे में दोनों ने संकेत दे दिया कि विधानसभा चुनाव में उन्हें शहर के प्रथम नागरिक के सपोर्ट की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। वहीं देखने वाली बात यह भी है कि विधानसभा चुनाव से पहले क्या मुन्नालाल कुशवाह अपने पद पर बने रहेंगे या उन्हें अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया पूर्ण कराकर पद से रूखसत कर दिया जाएगा। 

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