(संजय चिड़ार) शिवपुरी-करीब तीन दशकों से गेंद बल्ला वाले खिलाड़ी के रूप में पहचान रखने वाले एक जनप्रतिनिधि ने अभी तक सैंकड़ों युवाओं को अपनी अकेडमी में प्रशिक्षण दे चुके हंै, भले ही इनकी अकेडमी में प्रशिक्षण लिए खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर या फिर प्रदेश स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाते सामने नहीं आए हो, लेकिन गेंद बल्ला वालों का नाम तो शहर के बच्चा बच्चा की जुबान आ ही जाता है। इन्हीं गेंद बल्लाधारी द्वारा इस गेंद और बल्ले को आपस में लड़ाने की तैयारी की है और इसका शुभारंभ भी बड़ी धूमधाम से प्रदेश की दिग्गज नेता द्वारा किया जाएगा। अब खासबात यह है कि जिस तरह से इस गेंद बल्ला की लड़ाई को ऊपर से आकर्षक रूप दिए जाने की तैयारी है यदि उसमें अंदरूनी तौर पर झांककर देखें तो कुछ और ही नजर आएगा। सूत्रों से जो खबर निकलकर आ रही है उसके अनुसार गेंद बल्ला वाले जनप्रतिनिधि ने शहर के विभिन्न खेल प्रेमियों सेे चंदा इकट्ठा कर गेंद बल्ले को लड़ाने की तैयारी की है, लेकिन इस लड़ाई में लडऩे का मौका सिर्फ उन्हीं खिलाडिय़ों को दिया गया है जो स्वयं प्रतिनिधि के यहां फीस भरकर खेल के गुर सीखें हों, लेकिन अन्य खिलाडिय़ों को इससे दूर ही रखा गया है। इससे साफ स्पष्ट होता है कि गेंद बल्ले वाले जनप्रतिनिधि के इस कृत्य से उन खेल प्रेमियों के मन को तो ठेस पहुंचेगी ही जिनसे चंदा एकत्रित किया है साथ ही उन खिलाडिय़ों के मंसूबों पर भी पानी फिरा है जिनके मन में इस टूर्नामेंट में अपने हुनर को प्रदर्शन करने की आकांक्षा थी। यह सब धोरखधंधा इसलिए रचा गया जिससे टूर्नामेंट की विजेता ट्रॉफी, उपविजेता ट्रॉफी दोनों ही उन्हीं के पास ही रहेंगी अर्थात् चित्त भी अपना और पट्ट भी अपना। जनप्रतिनिधि का यह नेहले पर दहला इन दिनों लोगों की जुबान चर्चा का वायस बना हुआ है।

बड़ी खबर-गेंद बल्ला वाले जनप्रतिनिधि ने किए खेल-खेल में बारे न्यारे, चित्त भी अपना और पट्ट भी अपना
(संजय चिड़ार) शिवपुरी-करीब तीन दशकों से गेंद बल्ला वाले खिलाड़ी के रूप में पहचान रखने वाले एक जनप्रतिनिधि ने अभी तक सैंकड़ों युवाओं को अपनी अकेडमी में प्रशिक्षण दे चुके हंै, भले ही इनकी अकेडमी में प्रशिक्षण लिए खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर या फिर प्रदेश स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाते सामने नहीं आए हो, लेकिन गेंद बल्ला वालों का नाम तो शहर के बच्चा बच्चा की जुबान आ ही जाता है। इन्हीं गेंद बल्लाधारी द्वारा इस गेंद और बल्ले को आपस में लड़ाने की तैयारी की है और इसका शुभारंभ भी बड़ी धूमधाम से प्रदेश की दिग्गज नेता द्वारा किया जाएगा। अब खासबात यह है कि जिस तरह से इस गेंद बल्ला की लड़ाई को ऊपर से आकर्षक रूप दिए जाने की तैयारी है यदि उसमें अंदरूनी तौर पर झांककर देखें तो कुछ और ही नजर आएगा। सूत्रों से जो खबर निकलकर आ रही है उसके अनुसार गेंद बल्ला वाले जनप्रतिनिधि ने शहर के विभिन्न खेल प्रेमियों सेे चंदा इकट्ठा कर गेंद बल्ले को लड़ाने की तैयारी की है, लेकिन इस लड़ाई में लडऩे का मौका सिर्फ उन्हीं खिलाडिय़ों को दिया गया है जो स्वयं प्रतिनिधि के यहां फीस भरकर खेल के गुर सीखें हों, लेकिन अन्य खिलाडिय़ों को इससे दूर ही रखा गया है। इससे साफ स्पष्ट होता है कि गेंद बल्ले वाले जनप्रतिनिधि के इस कृत्य से उन खेल प्रेमियों के मन को तो ठेस पहुंचेगी ही जिनसे चंदा एकत्रित किया है साथ ही उन खिलाडिय़ों के मंसूबों पर भी पानी फिरा है जिनके मन में इस टूर्नामेंट में अपने हुनर को प्रदर्शन करने की आकांक्षा थी। यह सब धोरखधंधा इसलिए रचा गया जिससे टूर्नामेंट की विजेता ट्रॉफी, उपविजेता ट्रॉफी दोनों ही उन्हीं के पास ही रहेंगी अर्थात् चित्त भी अपना और पट्ट भी अपना। जनप्रतिनिधि का यह नेहले पर दहला इन दिनों लोगों की जुबान चर्चा का वायस बना हुआ है।
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