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प्रसिद्ध सिद्धेश्वर मेले की पंरपरा टूटने की आशंका

नगरपालिका ने मेला ठेेकेदार से साढ़े ग्यारह लाख रूपए कमाकर छोड़ा उसे भगवान भरोसे 
खुदाई से मेले का मुख्य दरवाजा हुआ बंद 
शिवपुरी। नगरपालिका और प्रशासन की गैर जिम्मेदारी एवं लापरवाह पूर्ण रवैये से शिवपुरी के प्रसिद्ध सिद्धेश्वर बाणगंगा मेले की परंपरा अब टूटने की कगार पर है। नगरपालिका ने सिद्धेश्वर मंदिर ट्रस्ट से मेला लगाने का ठेका साढ़े तीन लाख रूपए में प्राप्त कर व्यावसायिक मानसिकता का परिचय देते हुए उक्त ठेके को एक अन्य ठेकेदार अजय गौड़ को 14 लाख रूपए में दे दिया। नगरपालिका ने ठेकेदार  को आश्वसान दिया था कि सीवेज खुदाई को रूकवाकर मेला लगवाने की व्यवस्था की जाएगी ताकि आने जाने वाले दर्शकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े, लेकिन नगरपालिका अपने वायदे पर खरी नहीं उतरी है जिसके परिणामस्वरूप मेला प्रांगण के सामने पीएचई द्वारा सीवेज खुदाई निरंतर जारी है और खुदाई के मलबे ने सिद्धेश्वर मेले के मुख्य दरवाजे को ढक दिया है। अब सवाल यह है कि जब मुख्य दरवाजा ही बंद है तो मेला कैसे लगेगा और कैसे मेले में दर्शक आएंगे। मेले में ठेेकेदार अजय गौड़ दूर-दूर से दुकानदारों को भी ले आया है, लेकिन मेला नहीं लगने के कारण दुकानदार अब श्योपुर जाने की योजना बना रहे हैं। नगरपालिका बेबस बनी हुई है सीएमओ से लेकर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने हाथ खड़े कर दिए हैं। पहले ही सिद्धेश्वर ट्रस्ट द्वारा किए गए निर्माण से मेला स्थान काफी संकुचित हो गया है उसमें इस नई समस्या ने मेले की परंपरा टूटने के आसार उत्पन्न कर दिए हैं। 
ठेकेदार अजय गौड़ का कहना है कि नगरपालिका ने उनके साथ छलावा किया है। मेला लगने से पहले नपा प्रशासन ने उन्हें आश्वासन दिया था कि खुदाई रोककर मेले का संचालन किया जाएगा जिस कारण उन्होंने टेण्डर प्रक्रिया में भाग लेेकर 14 लाख रूपए और जीएसटी में उक्त ठेके को ले लिया और उसके कहने पर दुकानदार भी आ गए जो पिछले 20 दिनों से मेला प्रांगण में पड़े हुए हैं, लेकिन अब खुदाई कर रहे ठेकेदार ने खुदाई न रोकने की बात कही है जिससे यह स्थिति गंभीर हो गई है। इस पूरे मामले  में नपा सीएमआ गोविंद भार्गव और आरआई पूरन कुशवाह सहित नपाध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह से जब बात करने का प्रयास किया गया तो तीनों के मोबाइल बंद थे। जबकि नपा उपाध्यक्ष अन्नी शर्मा ने किसी बैठक में बैठे होने की बात कही। जिस कारण उनसे भी उनका पक्ष स्पष्ट नहीं हो पाया। 
विवाद के चलते शिवरात्रि से नहीं शुरू हो पाया था मेला 
वर्षों से नगरपालिका द्वारा संचालित सिद्धेश्वर बाणगंगा मेला शिवरात्रि के साथ ही शुरू हो जाता था, लेकिन इस बार नगरपालिका और प्रशासन के बीच चली तनातनी के कारण यह मेला शिवरात्रि पर प्रारंभ नहीं हो सका। बाद में प्रशासन ने टेण्डर जारी कर मेला लगाने की पहल की। तब जाकर नगरपालिका ने दिलचस्पी दिखाई और सिद्धेश्वर मंदिर ट्रस्ट में 3 लाख 50 हजार रूपए नगरपालिका द्वारा जमा किए गए। वहीं ग्वालियर के ठेकेदार अजय गौड़ ने उक्त मेले का ठेका 14 लाख रूपए मेें ले लिया और मेला लगाने की तैयारियां शुरू कर दी गईं और दिल्ली, बिहार सहित ग्वालियर और अन्य राज्यों से दुकानदार अपनी दुकानें लेकर शिवपुरी पहुंच गए हैं।
दुकानदार चिंता में, दूसरा दरवाजा भी होगा बंद 
मेले में कोई व्यवस्था न होने के कारण दुकानदारों पर संकट खड़ा हो गया है। मेले में दुकान लगाने आए बिहार निवासी गुड्डू, लाजिम, दिल्ली के छत्रपाल, ग्वालियर के हरेंद्र शर्मा, वीरेंद्र श्रीवास्तव, दिलीप जैन और संतोषीलाल जैन का कहना है कि वह पिछले 20 दिनों से यहां पर निवास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नगरपालिका ने कोई सहायता नहीं की। उन्हें पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है वहीं अब उनके समक्ष एक नई समस्या खड़ी हो गई है जिसका कारण सीवर लाईन है। सीवर लाइन का काम कर रहे ठेकेदार ने खुदाई से निकली मिट्टी से मेले  का एक दरवाजा बंद कर दिया है और आज सुबह उक्त ठेेकेदार ने उन्हें बताया कि खुदाई के कारण जल्द ही अब दूसरा दरवाजा भी बंद हो जाएगा। 
मंदिर के  बाहर चबूतरा बनाकर ट्रस्ट ने कम कर दी जगह  
मेला ठेकेदार अजय गौड़ का कहना है कि मंदिर के बाहर ट्रस्ट ने चबूतरे का निर्माण कर उस पर रेलिंग लगा दी है जिससे पहले से ही संकुचित ग्राउण्ड और भी संकुचित हो गया है और उक्त रैलिंग लगाने से 10 दुकानों की जगह घिर गई है वहीं बाउण्ड्री होने से भी दुकानें लगाने में परेशानी हो रही है। जबकि उन्होंने 200 दुकानों के हिसाब से टेण्डर में भाग लिया था, लेकिन यहां आकर पता पड़ा कि उक्त ग्राउण्ड में सिर्फ 100 ही दुकानें आ पाएंगी। 
58 वर्षों में पहली बार बनी है विवाद की स्थिति 
मेले में पापड़ की दुकान लगाने ग्वालियर से आए 80 वर्षीय संतोषीलाल जैन नगरपालिका से काफी नाराज हैं उनका कहना है कि शिवपुरी मेले में दुकान लगाते-लगाते उन्हें 58 साल बीत गए और वह हर वर्ष इस मेले में भाग लेते हैं, लेकिन इस वर्ष जो विवाद की स्थितियां बन रही हैं ऐसा पिछले 58 सालों में कभी नहीं हुआ। उनका कहना है कि प्रशासन ने सिद्धेश्वर मेले को खत्म करने की योजना बना ली है पहले तो पूरे मेला ग्राउण्ड को बाउण्ड्री को कवर कर दिया है और अब मेले के दरवाजे भी बंद कर दिए हैं। जिस कारण हम दुकानदार काफी परेशान हैं।
 
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