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किसानों का दर्द- कागज और वायदों में ही सिमटकर रह गया खेती का धंधा, जो मिलता है बड़े किसान ले जाते हैं

शिवपुरी। शासन द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही तमाम योजनाओं की धरातल पर सच्चाई जानें तो यह योजनाएं सिर्फ कागजों और दावों तक ही सिमटी नजर आएंगी। ऐसा दावा हम नहीं बल्कि किसान खुद कर रहे हैं। जब किसानों से कल कृषि उपज मंडी शिवपुरी बात की तो किसानों का दर्द उनकी जुबान पर आ गया। किसानों का कहना था कि खेती सिर्फ भाषण और कागजों में ही फायदे का धंधा है, अगर सरकारी योजनाओं का जो कुछ लाभ मिलता तो बड़े किसान ले जाते हैं और छोटे किसानों को जानकारी ही नहीं लग पाती। किसानों का कहना था कि उन्हें न तो भावांतर योजनाओं का लाभ मिला है और न ही समय पर भुगतान। इसी कारण उन्हें फसल बोबनी के समय साहूकारों से पैसे उधार लेने पड़ते हैं। किसानों का कहना ािा कि अगर खेती से छोटो और मझौले किसानों को  लाभ नहीं मिलने तो खेती को लाभ का धंधा कहना बेईमानी होगी। 

क्या कहते हैं किसान

  1. सरकार भले ही कितने ही दावे करे कि किसानी में आर्थिक मदद प्रदान के लिए बैंकों के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड बनवाते हैं। उन्हें योजनाओं का कितना लाभ मिलता है, यह जानना है तो बैंकों में किसान क्रेडिट कार्ड के आवेदन और केसीसी की संख्या को देखा जा सकता है।

अखयराज, किसान

  1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से मिलने वाले लाभ की हकीकत किसानों को बीमा योजना से मिलने वाली राशि के चेकों से जानी जा सकती है। कई बार ऐसे हालात बनते हैं किसान जितनी प्रीमियम राशि जमा करता है उसे उतनी ही राशि नहीं मिल पाती

पवन जाटव, किसान
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