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यशोधरा राजे ने बदला अपना अंदाज, इशारे-इशारों में विरोधियों पर साध रही निशाना

वक्त के थपेड़ों और अनुभवों से मिली सीख

शिवपुरी। वरिष्ठ भाजपा नेत्री और प्रदेश सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया अभी तक जिससे भी नाराज होती थी उससे अपनी अप्रसन्नता खुलकर व्यक्त करती थी। जिसके परिणामस्वरूप उन्हें समय-समय पर नुकसान उठाना पड़ता था। लेकिन लगता है वक्त के थपेड़ों और अनुभव से उन्होंने बहुत सीखा है। इसलिए विधानसभा चुनाव के चार माह पहले उनका अंदाज बेहद दार्शनिक हो गया है। अपने ट्वीटर एकांउट के जरिए यशोधरा राजे सिंधिया बड़ी समझदारी से अपने विरोधियों पर निशाना साध रही हैं। उनके अंदाजे बयां की एक झलक सफेद कुर्ते की चमक से दिल का मैल छुप नहीं सकता। अब समझने वाले समझ जाए कि झक्क सफेद कुर्ते वाले कौन से राजनेता काले दिल के हैं और न समझने वाले समझो अनाड़ी हैं। अंदाज लगाने वाले भले ही अंदाज लगाते रहें कि उनकी अपनी पार्टी के  नेताओं से नाराजी है लेकिन सच्चाई क्या है यह तो सिर्फ और सिर्फ यशोधरा राजे जानती हैं। 
यशोधरा राजे सिंधिया प्रदेश सरकार के उन गिने चुने मंंत्रियों में एक हैं जो सोशल मीडिया पर सर्वाधिक सक्रिय रहते हैं। सोशल मीडिया पर जहां उनकी राजनैतिक और सामाजिक सक्रियताओं का बखान रहता है वहीं वह गाये वगाहे अपने मन की व्यथा का भी बखान करती हैं। फेसबुक पर प्रत्येक सोमवार को मंडे पोजीटिव पोस्ट उनकी हमेशा चर्चित रहती है। जिसमें वह उपदेश देती हुई भी दिखाई देती हैं। वहीं जीवन की चाल समझता है, जो सफर में धूल को गुलाल समझता है। एक सोमवार को उन्होंने लिखा अनुभव आपसे वह करवाता है जो आपको करना चाहिए। लेकिन इन दिनों उनके ट्वीट के राजनैतिक हल्कों में अधिक चर्चे हैं। किसके कुर्ते की चमक उसके दिल के कालेपन को छुपा नहीं पा रही इसके बारे में उनका इशारा किस तरफ है? इसके विषय में हालांकि ट्वीट में कोई इशारा नहीं है। लेकिन एक पत्रकार ने अपनी प्रतिक्रिया अवश्य व्यक्त की है कि उनका कथन किसी को आईना दिखाने की कोशिश प्रतीत होता है। लेकिन वह कौन है? भाजपा या कांग्रेस के किस नेता की ओर उनका इशारा है? पहले वाली यशोधरा राजे होतीं तो शायद इसका जबाव भी मिल जाता लेकिन उन्होंने खुद कहा है कि अनुभव आपसे वह करवाता है जो आपको करना चाहिए। ट्वीटर पर उनका आत्मविश्वास भी झलकता हुआ नजर आ रहा है। उनके ट्वीट पर एक नजर दूसरों पर निर्भर ना रहें….. अंधकार में तो अपनी परिछाई भी साथ छोड़ जाती है। आशय यह है कि अपनी लड़ाई खुद लड़ों, दूसरों का क्या ऐतबार करें। राजनीति में भले लोगों को किस तरह की परेशानी और दिक्कत का सामना करना पड़ता है, इसे स्पष्ट करते हुए उन्होंने ट्वीट किया कि जीवन भी कितना अजीव है…. जो टेडे हैं उन्हें छोड़ दिया जाता है, जो सीधे हैं उन्हें ठोक दिया जाता है। ऐन चुनाव के मौके पर यशोधरा राजे की सोशल मीडिया पर उनके मन की पीड़ा उजागर होने से यह अनुमान लगाए जा रहे हैं कि उनकी नाराजी का कारण क्या है और उनके निशाने पर कौन है। लेकिन यशोधरा राजे के इस बदले हुए तेबर से प्रदेश की राजनीति अवश्य गरमा गई है। 

हमेशा चर्चित रहता है यशोधरा राजे का अतिरेक उत्साह

कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे का अतिरिक्त उत्साह हमेशा चर्चित बना रहता है। उनकी जब आंख टेड़ी होती है तो वह किसी को नहीं बख्शती हैं। हर काम सलीके से हो यह उनकी प्राथमिकता रहती है और इसमें कोई चूक हो तो वह किसी का लिहाज नहीं करती हैं। अफसरशाही के गलत कामों पर वह खुलकर प्रतिक्रिया व्यक्त करती हैं और निर्माण कार्यो में गड़बड़ी देखने पर ठेकेदार से लेकर अधिकारी को हड़काने में वह संकोच नहीं करती हैं। उनकी कार्यप्रणाली में मौके-मौके पर जिंदादिली और उत्साह भी देखने को मिलता है। अच्छे काम की तारीफ भी वह दिल खोल कर करती हैं। सोशल मीडिया पर खिलाडिय़ों का उत्साह बढ़ाती हुई वह नजर आती हैं। लेकिन जब उन्हें निशाना बनाया जाता है तो वह बिचलित भी हो बैठती हैं।  
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