(संजय चिड़ार) शिवपुरी। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत को
डिजीटल इंडिया का सपना देख रहे हैं और इसके प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपए फूंक रहे हैं, वहीं केन्द्र सरकार के अधीन संचालित होना कोलारस का पोस्ट ऑफिस इस डिजीटल इंडिया को तमाचा सा मारता प्रतीत होता है क्योंकि आज भी इस डिजीटल भारत में पोस्ट ऑफिस में कम्प्यूटर नहीं है जिससे की पोस्ट ऑफिस के कर्मचारी पासबुक पर एंट्री प्रिंट कर सकें। आज भी उपभोक्ताओं की पासबुकों पर पोस्ट ऑफिस में हाथ से एंट्री की जाती है। उपभोक्ताओं की मानें तो कई बार उनकी पासबुकों पर ही एंट्री न होने के कारण उन्हें घाटा भी उठाना पड़ता है। कर्मचारियों द्वारा एंट्री करने में टालमटोल की जाती है।
डिजीटल इंडिया का सपना देख रहे हैं और इसके प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपए फूंक रहे हैं, वहीं केन्द्र सरकार के अधीन संचालित होना कोलारस का पोस्ट ऑफिस इस डिजीटल इंडिया को तमाचा सा मारता प्रतीत होता है क्योंकि आज भी इस डिजीटल भारत में पोस्ट ऑफिस में कम्प्यूटर नहीं है जिससे की पोस्ट ऑफिस के कर्मचारी पासबुक पर एंट्री प्रिंट कर सकें। आज भी उपभोक्ताओं की पासबुकों पर पोस्ट ऑफिस में हाथ से एंट्री की जाती है। उपभोक्ताओं की मानें तो कई बार उनकी पासबुकों पर ही एंट्री न होने के कारण उन्हें घाटा भी उठाना पड़ता है। कर्मचारियों द्वारा एंट्री करने में टालमटोल की जाती है।
क्या कहते हैं उपभोक्ता
मेरी पोस्ट ऑफिस में 40 हजार की एफडी थी जिस पर एक साल का 2800 रुपए ब्याज मिला। इसे मैंने अपने खाते में ट्रांसफर कराया तो कर्मचारी द्वारा 40 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए, जब मैं वापस लौटकर पहुंचा और मैंने पूछा कि क्या इस पर ब्याज नहीं मिला तो कर्मचारियों द्वारा कहा गया है कि मुझसे गलती हो गई और मुझे नगद 2800 रुपए दिए थे।
उपभोक्ता कोलारस






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