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एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में सड़कों पर उतरा दलित युवाओं का सैलाब

शिवपुरी। विगत दिवस सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक

जनहित याचिका पर निराकरण करते हुए एससी-एसटी एक्ट में बदलाव किए थे। दलितों और आदिवासियों के उत्पीडऩ में सीधे गिरफ्तारी और केस दर्ज कराने पर रोक लगाने का फैसला सुनाया था। इस फैलने के विरोध में दलित संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया था। इसी क्रम में आज शिवपुरी में भीम युवा संगठन के बैनर तले युवाओं द्वारा हजारों की तादाद में रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया।
आज सुबह 11 बजे अम्बेडकर मंगल भवन पर हाथ में नीला झंडा लेकर युवा एकत्रित हुए और धीरे-धीरे युवाओं की तादाद बढ़ती गई। यहां पहले से युवाओं द्वारा जय-जय-जय जय भीम के के जमकर नारे लगाए, साथ ही नरेन्द्र मोदी मुुर्दाबाद, शिवराज सिंह मुर्दाबाद के नारे लगाए। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए भी कोतवाली एड. एसपी कमल मौर्य, एडीओपी जीडी शर्मा, टीआई संजय मिश्रा, फिजीकल थाना प्रभारी विकास यादव सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। यातायात बहाल करने के लिए प्रभारी धर्मसिंह कुशवाह भी अपने बल के साथ मौजूद रहे।   कुछ समय बाद रैली प्रारंभ हुई। इस दौरान बाजार बंद कराने का भी प्रयास किया, स्थिति उग्र होते देख कमलागंज में पुलिस द्वारा भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अश्रु गैस का प्रयोग किया गया।  दलित युवाओं हजारों की संख्या में शहर से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्ट्रेट में कलेक्टर तरूण राठी को महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में राष्ट्रपति से मांग की गई कि अनुसूचित जाति जनजाति निवारण अधिनियम को पुन: प्रभावी बनाने हेतु अध्यादेश जारी किया जाए। तथा सुप्रीम कोर्ट में एससीएसटी एक्ट पर पुनर्विचार हेतु याचिका दायर की जाए।

महामहिम के नाम इन 20 सूत्रीय माँगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

1-एससी/एसटी एक्ट के पुन: बहाली हेतु अध्यादेश जारी किया जाए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को शून्य किया जाये।
2-भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार अनुच्छेद 14, 15,17,19,23 आदि को प्रभारी बनाये जाने वाले एससी/एसटी एक्ट 1989 पुन: बहाल किया जाए।
3-भारत सरकार की तरफ से माननीय सुप्रीम कोर्ट में एससी/एसटी एक्ट पर पुर्नविचार हेतु याचिका दायर की जावे।
4-एससी/एसटी एक्ट 1989 एवं आरक्षण को संविधान की 9 वीं अनुसूची में रखा जाये।
5-एससी/एसटी एक्ट एक्ट 1989 को निष्प्रभावी करने वाले न्यायाधीश के विरूद्ध एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया जावे, साथ ही संविधान के अनुच्छा 124 के तहत महावियोग चलाया जाए, क्योंकि एससी/एसटी एक्ट वर्ग के मौलिक अधिकारों का हनन किया है।
6-सुप्रीम कोर्ट में एससी/एसटी एक्ट पर सुनवाई के दौरान भारत सरकार के मंत्रियों, सांसदों, न्यायाधिकारियों द्वारा पक्ष न रखने के कारण इनके विरूद्ध एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्यवाही की जावे।
7-उच्च न्यायिक सेवाओं सहित अन्य संवैधानिक संख्याओं मेें एससी/एसटी एवं ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान किया जावे।
8-ओबीसी के आरक्षण को क्रीमीलेयर बंधन मुक्त किया जावे।
9-निजी क्षेत्र में एससी/एसटी ए वं ओबीसी के लिए आरक्षण का प्रावधन किया जावे।
10-ओबीसी के लिए राजनैतिक आरक्षण का प्रावधान किया जावे।
11-मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू कर ओबीसी को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत आरक्षण किया जावे।
12-पदोन्नति में आरक्षण बहाल किया जावे।
ृ13-एससी/एसटी एक्ट एवं आरक्षण के नियम का विरोध करने वाले शासन के अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ संवधौनिक सजा का प्रावधान किया जावे।
14-संविधान की मूल भावना, मौलिक अधिकार एवं संविधान का विरोध करने वाले पर राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज किया जावे।
15-भारत सरकार एवं राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं में एससी/एसटी एवं ओबीसी वर्गों का आरक्षण रखा जाव।
16-महिलाओं को नौकरियों, सांसद एवं विधानसभाओं में अनारक्षित सीटों में से पृथक आरक्षण दिया जावे।
17-धार्मिक अल्पसंख्या समुदाय के सर्वांगीण विकास हेतु संविधान सम्मत सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करें तथा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को मौलिक अधिकारों में रखा जावे।
18-आरक्षित वर्ग के सांसदों एवं विधायकों को दलगत विहिप से मुक्त कर स्वतंत्रता प्रदान की जावे जिससे वे एससी/एसटी एवं ओबीसी वर्गों के प्रति जबावदेह हो सकें। संवेदनहीनता दिखने पर इन्हें जिम्मेदार मानकर इनके विरूद्ध संवैधानिक कार्यवाही का प्रावधान हो।
19-माननीय न्यायपालिका में कार्यकरत न्यायाधीशों को आन्तरिक स्वतंत्रता प्रदान की जावे।
20-राज्यसभा में एससी/एसटी एवं ओबीसी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु आरक्षण की व्यवस्था की जावे।

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