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जेठ और देवरानी के विरूद्ध चैक चोरी और दस्तावेज कूटकरण का मामला दर्ज

चैक चोरी कर आरोपियों ने 2 करोड़ 28 लाख रूपये भरकर करा लिए बाउंस
शिवपुरी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुश्री कामिनी प्रजापति ने परिवादी लक्ष्मीदेवी पत्नी स्व. सुभाषचंद सिंघल निवासी नवग्रह मंदिर के पीछे कमलागंज शिवपुरी के परिवाद पर उनके जेठ कैलाश सिंघल पुत्र स्व. बालकिशन दास सिंघल और देवरानी नीलम सिंघल पत्नी अनिल सिंघल के विरूद्ध भादवि की धारा 457, 380, 467, 468 के तहत मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं। 
आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने फरियादिया लक्ष्मीदेवी के घर से चैकबुक चुराकर उनमें 5 चैकों के माध्यम से 2 करोड़ 28 लाख 85 हजार रूपये की रकम भरकर उसे बैंक से बाउंस करा लिए तथा परक्राम्य लिखित अधिनियम के तहत परिवादी को अपने अभिभाषक के माध्यम से नोटिस जारी कर दिए। परिवादी लक्ष्मीदेवी ने अपने परिवाद में यह भी बताया कि जेठ कैलाश सिंघल के पुत्र धर्मेन्द्र द्वारा उक्त कपटपूर्ण कार्य में सहभागीदार बनने से इंकार कर दिया था। परिवादी की ओर से पैरवी अभिभाषक विजय तिवारी ने की। परिवादिया ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुश्री कामिनी प्रजापति के न्यायालय में परिवाद दायर किया कि आरोपी कैलाश सिंघल ने उसकी पुत्रवधु की 19 जुलाई 2012 को गहन मारपीट की। इस कारण वह अपनी बहू को इलाज के लिए जिला चिकित्सालय शिवपुरी लेकर आई। जब अगले दिन 20 जुलाई को वह अपनी बहू रेणु को जिला अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर लौटी तो उसने अपने एक संदूक का ताला टूटा पाया। उक्त संदूक में उसकी बैंक की पासबुक, चैकबुक तथा उसके पुत्र दिलीप की पासबुक एवं चैकबुक गायब मिले। जिसकी उसने 21 जुलाई को थाना कोतवाली शिवपुरी में लिखित रूप से शिकायत की। परिवादी लक्ष्मी सिंघल का कहना है कि आरोपी कैलाश सिंघल का पुत्र धर्मेन्द्र के पास माह फरवरी 2013 में जाकर आरोपी द्वारा यह व्यक्त किया गया कि उसने लक्ष्मी सिंघल एवं उसके पुत्र दिलीप के कोरे हस्ताक्षरित चैक चोरी से प्राप्त कर लिए हैं। उन चैकों में से कुछ चैक में रकम भरकर वह अपने पुत्र धर्मेन्द्र सिंघल के नाम से बाउंस कराना चाहता था, लेकिन धर्मेन्द्र ने जब इंकार किया तो आरोपीगण कैलाश सिंघल द्वारा तीन चैकों में 1 करोड़ 8 लाख 10 हजार रूपये तथा आरोपी नीलम सिंघल द्वारा दो चैकों में 1 करोड़ 20 लाख 75 हजार रूपये की राशि भरकर उक्त पांचों चैक बाउंस करा लिए। परिवादी लक्ष्मी सिंघल ने बताया कि 18 अप्रैल 2013 को उसे एक रजिस्टर्ड सूचना पत्र प्राप्त हुआ जिससे उसे पता चला कि किस तरह से उसके साथ चोरी तथा बेईमानीपूर्वक चैक चुराकर कूटरचित दस्तावेज तैयारी कर उसे आर्थिक हानि पहुंचाने तथा धोखाधड़ी करने का षड्यंत्र रचा गया है। परिवादी का कहना है कि नोटिस प्राप्ति उपरांत उसे यह विश्वास हो गया कि उसके निवास स्थान से 19 जुलाई 2012 से 20 जुलाई 2012 के मध्य चोरी एवं बेईमानीपूर्वक प्राप्त उक्त चैकों का कूटरचित दस्तावेज के रूप में आरोपियों द्वारा दुरूपयोग किया जा रहा है। 
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