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राजनीतिक दलों का प्रचार कर रहे शिक्षकों पर आखिर कब तक मेहरबानी…?

कोलारस। विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और आने वाली 28 नवंबर को मतदान होगा। कोलारस के ग्रामीण अंचलों में स्थित शासकीय विद्यालयों में पदस्थ अधिकांश शिक्षक किसी ना किसी राजनीतिक दलों से जुड़े हुए है ,जिसके चलते वह चुनाव के अंतिम समय में पूरी दम के साथ पार्टी का प्रचार प्रचार करते हैं और उन्होंने हाल ही में हुए उपचुनाव में खुलकर भाजपा का प्रचार-प्रचार किया था, परंतु इन पर कार्रवाई ना होने के चलते इन शिक्षकों के हौसले बुलंद बने हुए हैं। यह शिक्षक विद्यालयों में ना जाते हुए ,कोलारस नगर में ही पार्टी की बैठकों में गुपचुप तरीके से शामिल होते हैं और पार्टी को वोट देने की अपील चुनाव के अंतिम समय में खुलकर करते हैं जिसके चलते चुनाव प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है। लोगों में गलत संदेश जाता है कोलारस के आसपास स्थित ग्रामीण अंचलों से लेकर निर्वाचन विभाग सहित अधिकांश शासकीय कार्यालयों में ऐसे शिक्षक कर्मचारी पदस्थ हैं जो किसी ना किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हुए हैं और पूरी दम के साथ राजनीतिक दलों का प्रचार-प्रसार खुलेआम करते हैं ,जो कि पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है। ऐसे शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची अधिकारियों को बनाकर उन पर कार्रवाई करना चाहिए, जिससे मतदान प्रभावित ना हो। नियमों की बात करें तो शासकीय कर्मचारी किसी भी राजनीतिक दल का प्रचार-प्रसार नहीं कर सकता। निर्वाचन अधिकारी सहित कोलारस में पदक जिम्मेदार अधिकारियों को ऐसे शिक्षकों कर्मचारियों पर कार्रवाई करना चाहिए, जिससे अन्य कर्मचारी से ऐसी गलती ना करें और किसी भी राजनीतिक दलों की बैठकों में ना जाएं। हमारे द्वारा ऐसे शिक्षकों के नाम शीघ्र ही उजागर किए जाएंगे है और उन पर कार्रवाई कराने के लिए सूची भी आलाधिकारियों को दी जाएगी। देखते हैं आखिर पर इन शिक्षकों पर मेहरबानी बनी रहेगी..?

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