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 EC अरुण गोयल का इस्तीफा लोकसभा चुनाव से पहले: कार्यकाल 2027 तक था, CEC राजीव कुमार फिलहाल अकेले तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में /#NATIONAL

नई दिल्ली

अरुण गोयल पंजाब कैडर के रिटायर्ड IAS अफसर हैं।

चुनाव आयुक्त (EC) अरुण गोयल ने इस्तीफा दे दिया है। शनिवार 9 मार्च को जारी गजट नोटिफिकेशन में इसके बारे में जानकारी दी गई। गोयल का इस्तीफा उस वक्त आया है, जब कुछ दिनों में लोकसभा चुनाव का ऐलान होने वाला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

अरुण गोयल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) बनने की कतार में थे, क्योंकि मौजूदा CEC राजीव कुमार फरवरी 2025 में रिटायर होने वाले हैं। गोयल ने 21 नवंबर 2022 में चुनाव आयुक्त का पद संभाला था। उनका कार्यकाल 5 दिसंबर 2027 तक था।

चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, गोयल और CEC राजीव कुमार के बीच फाइल पर मतभेद हैं। हालांकि, गोयल ने इस्तीफे के लिए निजी कारणों का हवाला दिया है। केंद्र ने उन्हें पद छोड़ने से रोकने की कोशिश की थी।गोयल की सेहत भी ठीक है। इसलिए खराब स्वास्थ्य के कारण इस्तीफे की अटकलों को खारिज किया गया है।

तीन मेंबर बाले आयोग में CEC राजीव कुमार अकेले

CEC राजीव कुमार के साथ पूर्व चुनाव आयुक्त अरुण गोयल और अनूप पांडे। फाइल फोटो

CEC राजीव कुमार के साथ पूर्व चुनाव आयुक्त अरुण गोयल और अनूप पांडे। फाइल फोटो

अरुण गोयल के इस्तीफे के बाद तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में केवल CEC राजीव कुमार ही रह गए हैं। इससे पहले अनूप पांडे 15 फरवरी को चुनाव आयुक्त पद से रिटायर हुए थे। पांडे के रिटायरमेंट के बाद से चुनाव आयोग में एक पद खाली था।

गोयल 1985 बैच के पंजाब कैडर के रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं। उन्होंने 18 नवंबर 2022 को सचिव (भारी उद्योग) पद से वीआरएस लिया था। इसके एक दिन बाद वे चुनाव आयुक्त बनाए गए थे। गोयल हाल में चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के लिए विभिन्न राज्यों का दौरा कर रहे थे। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर दौरा बीच में छोड़ दिया था।

गोयल के इस्तीफे पर क्या बोला विपक्ष
मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस अध्यक्ष: 
इलेक्शन कमीशन या इलेक्शन ओमिशन। लोकसभा चुनाव से पहले ऐसा क्यों? हमने स्वतंत्र संस्थाओं का खत्म किया जाना नहीं रोका तो लोकतंत्र पर तानाशाही कब्जा कर लेगी।

के सी वेणुगोपाल, कांग्रेस नेता: ECI जैसी संवैधानिक संस्था में बिल्कुल भी पारदर्शिता नहीं है। केंद्र सरकार उन पर दबाव डालती है। 2019 में चुनावों के दौरान, तत्कालीन आयुक्त अशोक लवासा ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन मामले में पीएम मोदी को क्लीन चिट देने पर असहमति जताई थी। बाद में उन्हें लगातार पूछताछ का सामना करना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट गया था गोयल की नियुक्ति का मामला
NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने अरुण गोयल की चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। सुनवाई से पहले ही दो जज जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना ने हियरिंग से खुद को अलग कर लिया था।

ADR ने याचिका में कहा था कि गोयल की नियुक्ति कानून के मुताबिक सही नहीं है। साथ ही यह निर्वाचन आयोग की सांस्थानिक स्वायत्तता का भी उल्लंघन है। ADR ने सरकार और इलेक्शन कमीशन पर खुद के फायदे के लिए अरुण गोयल की नियुक्ति करने का आरोप लगाया था। साथ ही गोयल की नियुक्ति को रद्द करने की मांग की थी।

ऐसे होगी नए आयुक्त की नियुक्ति
29 दिसंबर 2023 को ही CEC और EC की नियुक्ति का कानून बदला है। इसके मुताबिक, विधि​ मंत्री और दो केंद्रीय सचिवों की सर्च कमेटी 5 नाम शॉर्ट लिस्ट कर चयन समिति को देगी। प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता या सबसे बड़े विरोधी दल के नेता की तीन सदस्यीय समिति एक नाम तय करेगी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्ति होगी।

2019 के चुनाव के बाद लवास ने दिया था इस्तीफा
अशोक लवासा ने अगस्त 2020 में निर्वाचन आयुक्त पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने 2019 के आम चुनाव में निर्वाचन आयोग द्वारा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के कई निर्णयों पर असहमति जताई थी।

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