नई दिल्ली

गुजरात में सूरत लोकसभा सीटट से BJP कैंडिडेट मुकेश दलाल।
गुजरात में सूरत लोकसभा सीट से BJP कैंडिडेट मुकेश दलाल का निर्विरोध जीतना तय हो गया है। दरअसल यहां से कांग्रेस कैंडिडेट नीलेश कुंभाणी का पर्चा रद्द हो गया था। उनके पर्चे में गवाहों के नाम और हस्ताक्षर में गड़बड़ी थी। इसके बाद 7 निर्दलीय कैंडिडेट ने कल अपना नामांकन वापस ले लिया था। बीएसपी कैंडिडेट प्यारे लाल भारती ही बचे थे, जिन्होंने सोमवार को पर्चा वापस लिया। इस तरह मुकेश दलाल निर्विरोध हो गए।
उधर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के कांकेर में चुनावी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के कार्यकाल में बड़े-बड़े फैसले लिए गए जो 70 सालों में नहीं लिए गए। हमने आतंकवाद को समाप्त किया। कश्मीर से धारा 370 को हटाया। देशभर से आतंकवाद को खत्म किया। अब छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद को भी एक-दो साल में खत्म कर देंगे।
छत्तीसगढ़ में पिछले पांच साल कांग्रेस सरकार रही, उसने नक्सलियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। भाजपा सरकार आते ही पांच महीने में 90 नक्सलियों को खत्म किया गया।
लोकसभा चुनाव में खुला भाजपा का खाता, सूरत सीट पर बीजेपी कैंडिडेट मुकेश दलाल निर्विरोध जीते
लोकसभा चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी के लिए गुजरात से अच्छी खबर आई है. सूरत लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद बाकी बचे 8 उम्मीदवारों ने भी अपने नाम वापस ले लिए हैं, जिसके बाद बीजेपी की निर्विरोध जीत तय हो गई है. इसके साथ ही लोकसभा चुनाव में बीजेपी का खाता भी खुल गया है. यहां से भाजपा उम्मीदवार मुकेश दलाल हैं.
दरअसल, सूरत लोकसभा सीट से कांग्रेस के कैंडिडेट निलेश कुम्भानी चुनाव अधिकारी के समक्ष अपने तीन में से एक भी प्रस्तावक को मौजूद नहीं रख पाए थे जिसके बाद चुनाव अधिकारी ने निलेश कुम्भानी का नामांकन फॉर्म रद्द कर दिया था. बीजेपी ने कांग्रेस के कैंडिडेट निलेश कुम्भानी के फॉर्म में उनके तीन प्रस्तावकों के हस्ताक्षर को लेकर सवाल उठाए थे.
वहीं कांग्रेस ने नामांकन खारिज का आरोप सरकार पर मढ़ दिया है. कांग्रेस ने कहा कि सरकार की धमकी के सामने सब डरे हुए हैं. कांग्रेस के नेता और एडवोकेट बाबू मांगुकीया ने कहा हमारे तीनों प्रस्तावकों का अपहरण हुआ है, चुनाव अधिकारी को अभी फॉर्म पर हस्ताक्षर हुए हैं या नहीं, इसकी नहीं बल्कि अपहरण की जांच करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हस्ताक्षर टेली किए बगैर फॉर्म रद्द करना गलत है, प्रस्तावकों के हस्ताक्षर सही हैं या गलत उसकी जांच के बगैर फॉर्म रद्द करना गलत है.
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