शिवपुरी। वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए जिला परिवहन विभाग से वाहनों को फॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं जिन्हें रिन्यू भी कराया जाता है। परिवहन विभाग के प्रदूषण जाँच केन्द्र का सॢटफिकेट के नाम पर नियमों को दरकिनार करते हुए रेबडिय़ों की तरह अयोग्य वाहनों को भी सॢटफिकेट बांटे जा रहे हैं। इसी तरह का एक मामला हमारे संज्ञान में आया है। मामले में जाँच केन्द्र द्वारा वाहन क्रमांक एमपी 33 आर 1758 के नाम से एक सॢटफिकेट जारी किया है जबकि सॢटफिकेट पर दूसरे मिलते जुलते वाहन के नंबर का फोटो खींचा गया है वह नंबर है एमपी 33 आर 1798 है। इस प्रकार एक ही सर्टिफिकेट पर दो अलग-अलग नंबरों का होना जांच केन्द्र के फर्जीवाड़े को उजागर करता है। यह जांच केन्द्र आरटीओ कार्यालय के अधीन होते हैं। इनके द्वारा की जाने वाली गड़बडिय़ों पर निगरानी रखने की जिम्मेदार जिला परिवहन अधिकारी की होती है, लेकिन परिवहन अधिकारी की अनदेखी के चलते जाँच केन्द्र द्वारा मनमाने तरीके से मोटी फीस ऐंठकर सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं। इस प्रकार इन वाहनों द्वारा पर्यावरण को दूषित किया जा रहा है।इनका कहना है
इस तरह की गड़बड़ी हुई तो पहले यह पता चलाना होगा कि यह सॢटफिकेट किस जाँच केन्द्र से जारी हुआ है। जानकारी मिलने पर उसके खिलाफ जाँच की जाएगी। दोनों नंबर मिलते जुलते भी है कहीं कम्प्यूटर ऑपरेटर की भी गलती हो सकती है।
विक्रमजीत सिंह कंग
जिला परिवहन अधिकारी शिवपुरी






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