शिवपुरी। प्रदेश में जारी शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया के बीच सांदीपनि विद्यालयों (पूर्व में सीएम राइज विद्यालय) एवं विशिष्ट विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों ने स्थानांतरण नीति में संशोधन की मांग उठाई है। शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान स्थानांतरण नीति के कुछ प्रावधान उनके लिए अवसरों की समानता को प्रभावित कर रहे हैं, इसलिए इनमें आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।
शिक्षकों ने शासन और स्कूल शिक्षा विभाग के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि सांदीपनि एवं विशिष्ट विद्यालयों में पदस्थ शिक्षकों को भी अन्य शासकीय विद्यालयों में स्थानांतरण के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को वेतन, भत्ते एवं अन्य सुविधाएं सामान्य शिक्षकों के समान प्राप्त होती हैं, फिर भी उन्हें स्थानांतरण के लिए आवेदन करने से वंचित रखा गया है। इससे उनके कैरियर विकास और व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुरूप स्थानांतरण के अवसर सीमित हो जाते हैं।
दूसरी मांग जनगणना कार्य में संलग्न शिक्षकों को भी स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल करने की है। शिक्षकों का कहना है कि जनगणना एक महत्वपूर्ण शासकीय दायित्व है, लेकिन केवल इस कार्य में संलग्न होने के कारण उन्हें स्थानांतरण के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उनका सुझाव है कि आवश्यकता पड़ने पर विभाग स्थानांतरण आदेश जारी कर सकता है तथा कार्यमुक्ति जनगणना कार्य पूर्ण होने के बाद दी जा सकती है।
तीसरी मांग स्थानांतरण के लिए निर्धारित 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता को समाप्त करने की है। शिक्षकों के अनुसार तकनीकी समस्याओं, नेटवर्क की कमी तथा अन्य प्रशासनिक कारणों से कई बार उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिससे पात्र शिक्षक भी स्थानांतरण के अवसर से वंचित हो सकते हैं।
शिक्षकों एवं विभिन्न शिक्षक संगठनों का कहना है कि स्थानांतरण नीति में आवश्यक संशोधन कर सभी शिक्षकों को समान अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। उनका मानना है कि इससे शिक्षकों में संतोष बढ़ेगा, कार्यक्षमता में सुधार होगा तथा शिक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ बनेगी।
इस संबंध में राज्य शिक्षक कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अमरदीप श्रीवास्तव ने प्रदेश सरकार एवं स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि शिक्षकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण नीति में आवश्यक बदलाव किए जाएं।







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