शिवपुरी। जिले में प्रतिबंधित एवं नियंत्रित श्रेणी की भूमि के अवैध हस्तांतरण, पंजीयन और नामांतरण पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। मंगलवार को आयोजित बैठक में जिला पंजीयक, उप पंजीयकों, तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने कहा कि अहस्तांतरणीय भूमि, पट्टे की भूमि, शासन प्रदत्त भूमि, भूदान भूमि तथा अन्य प्रतिबंधित श्रेणी की जमीनों के संबंध में बिना सक्षम अनुमति के पंजीयन और नामांतरण किए जाने से शासन के हित प्रभावित होते हैं। मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 के अनुसार ऐसी भूमि का हस्तांतरण कलेक्टर या सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता।
नामांतरण से पहले होगी दस्तावेजों की जांच
तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी नामांतरण प्रकरण में भूमि की प्रकृति, खसरा रिकॉर्ड, सक्षम अनुमति और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किए बिना आदेश पारित न किए जाएं। केवल प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण करने के बजाय हस्तांतरण की वैधता की जांच अनिवार्य होगी।
पांच वर्षों के मामलों की होगी समीक्षा
कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि पिछले पांच वर्षों में प्रतिबंधित श्रेणी की भूमि से जुड़े सभी नामांतरण प्रकरणों की समीक्षा की जाए। जिन मामलों में सक्षम अनुमति उपलब्ध नहीं होगी, उनकी अलग से जांच कर रिपोर्ट उपखंड अधिकारी के माध्यम से कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी।
अनियमितता पर होगी कार्रवाई
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में यदि किसी प्रतिबंधित भूमि का अवैध पंजीयन या नामांतरण पाया जाता है तो संबंधित उप पंजीयक, तहसीलदार या नायब तहसीलदार की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी। ऐसे मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई, प्रतिकूल प्रविष्टि और दायित्व निर्धारण की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।







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