शिवपुरी। मक्सी-दाहोद बस हादसे में 4 साल की मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत के बाद शिवपुरी परिवहन विभाग हरकत में आया है। हादसे के बाद जिला प्रशासन ने जिलेभर में यात्री बसों की सघन जांच शुरू कर दी है। पिछले तीन दिनों में 75 स्लीपर और यात्री बसों की जांच की गई, जिनमें से 25 वाहनों पर नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर 1 लाख 4 हजार 500 रुपए का जुर्माना लगाया गया।
कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के निर्देश पर जिला परिवहन अधिकारी रंजना कुशवाहा की टीम लगातार कार्रवाई कर रही है। विभाग का दावा है कि बसों की फिटनेस, परमिट, ओवरलोडिंग, फायर सेफ्टी, इमरजेंसी इंतजाम और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसे रोके जा सकें।
लेकिन परिवहन विभाग की इस कार्रवाई ने अब कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि जब तीन दिन की जांच में ही 25 बसें नियम तोड़ते पकड़ी गईं, तो आखिर ये वाहन अब तक किसकी मेहरबानी से सड़कों पर दौड़ रहे थे? सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या परिवहन विभाग की अनदेखी या संरक्षण के चलते खटारा और नियम विरुद्ध बसें यात्रियों की जान जोखिम में डाल रही थीं?
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं कि कई निजी बसें बिना फिटनेस, ओवरलोडिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए संचालित हो रही हैं। कई बसों में फायर सेफ्टी तक के इंतजाम नहीं रहते, जबकि रात के समय स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे रहती है।
हादसे के बाद अचानक शुरू हुई सख्ती को लेकर भी लोग सवाल उठा रहे हैं। आमजन का कहना है कि यदि परिवहन विभाग पहले से नियमित और निष्पक्ष जांच करता तो शायद कई हादसे टाले जा सकते थे। कार्रवाई के बाद यह भी चर्चा है कि जिले में वर्षों से चल रही कई बसों को कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण प्राप्त था, तभी नियमों की अनदेखी के बावजूद उन पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब नियम तोड़ने वाले बस संचालकों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। बस ऑपरेटरों को भी चेतावनी दी गई है कि परिवहन नियमों का पालन नहीं करने पर भारी जुर्माने के साथ परमिट निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।











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