
डेयरी संचालक बोले दूध वाले यदि 37 में देंगे तो आमजन को हम 42 में देंगे, प्रशासन बोला आमजन पर बोझ नहीं पड़ने देंगे 40 रुपए लीटर में बेचे दूध, नहीं माने डेयरी संचालक
शिवपुरी। शहर में दो दिन से चल रही दूधियों की हड़ताल शुक्रवार की शाम समाप्त हो गई है। शनिवार से शहर के लोगों को प्वाइंट बनाकर पुलिस और पटवारी की निगरानी में सीधे 37 रुपए लीटर 200 ग्राम मावे वाला दूध बेचा जाएगा। जिला पंचायत के सभागार में दो घंटे चली बैठक में दूधियों ने प्रशासन की बात को तरजीह देते हुए 40 रुपए की जगह 37 रुपए दाम तय कर दिया, लेकिन डेयरी संचालक इस बात पर अड़े रहे कि यदि दूधिए उन्हें 37 रुपए लीटर दूध देंगे तो वह आमजन को 42 रुपए लीटर में दूध देंगे। इस पर प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाया और कहा कि आमजन पर बोझ नहीं डाला जाएगा।
आमजन को डेयरी संचालक 40 रुपए लीटर में ही दूध दें, क्योंकि वह पहले से ही 5 रुपए मुनाफा कमा रहे हैं। अब वह 3 रुपए लीटर पर धंधा करें, जबकि डेयरी संचालकों का कहना था कि उनका खर्चा होता है। उन्हें एक रुपए लीटर ही मुनाफा मिल रहा है। 2 घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद दूधिए 37 रुपए लीटर में दूध देने राजी हो गए। उन्होंने हड़ताल खत्म कर दी। दूधियों का कहना था कि वह डेयरी पर नहीं बल्कि आम जनता को बूथ बनाकर दूध बेचेंगे। इस पर एडीएम आरएस बालौदिया ने एसडीएम अतेन्द्र गुर्जर से कहा कि पुलिस और पटवारी की निगरानी में आम जनता को बूथ बनाकर दूध का विक्रय कराया जाए।
यहां आज से बूथ बनाकर मिलेगा आमजन को दूध
दूधियों का कहना है कि वह डेयरी पर नहीं बल्की आम जनता को 37 रुपए लीटर में ही दूध उपलब्ध कराएंगे। चाहे डेयरी संचालक उन्हें दाम अधिक भी दें तो भी वह अपना दूध डेयरी पर नहीं बेचेंगे। दूधियों ने कहा कि वह झांसी तिराहा, माधव चौक चौराहा, कमलागंज, नीलगर चौराहा सहित अस्पताल चौराहे पर बूथ बनाकर दूध आमजनता को बेचा जाएगा।
एसडीएम बोले-कौन क्या-क्या काला पीला करता है, हम सब जानते हैं
जब डेयरी संचालक अपनी हठ पर अड़े थे। दाम बढ़ाने को तैयार नहीं हुए तो एसडीएम अतेन्द्र गुर्जर ने तीखे लहजे में कहा कि कौन कौन क्या क्या काला पीला कर रहा है हम सब जानते हैं। कल से हम यदि छापामारी शुरू करेंगे तो सबका काला पीला सामने आ जाएगा इसके बाद डेयरी संचालक ठंडे पड़ गए।
एडीएम बोले- प्रशासन क्या कर सकता है बताऊं
दूध डेयरी संचालक प्रशासन की बात मानने को तैयार नहीं थे। 37 रूप्ए का भाव देने तैयार तो हुए, लेकिन जनता से 42 रुपए लीटर दूध बेचने की कहने लगे। इस पर एडीएम आरएस बालौदिया ने कहा कि दाम नहीं बढ़ेंगे। आमजनता को परेशान नहीं होना दिया जाएगा। दूध अति आवश्यक सेवा में है, इसलिए यदि डेयरी संचालक अपनी बात पर अड़े रहे तो प्रशासन क्या कर सकता हैं बताऊं क्या। इसके बाद डेयरी संचालकों के तेवर ढीले हो गए।
प्रशासन चाहेगा तो नहीं जाएगा दूध बाहर
डेयरी संचालकों ने कहा कि हजारों लीटर दूध हर रोज शहर से बाहर जा रहा है। अधिकारियों ने नोवा प्लांट के अधिकारी अनिल यादव को बुलवाया और पूछा कि उनके पास कितना दूध है। इस पर नोवा के अधिकारी ने बताया कि 25 हजार लीटर दूध उनके पास है। बीते रोज हड़ताल के चलते दूधिए 10 हजार लीटर दूध उनके पास बेच गए हैं। इस तरह से उनके पास 35 हजार लीटर से अधिक दूध है। उसे वह किसी डेयरी संचालक को नहीं बेचते हैं बल्कि यह दूध प्लांट में जाता है।
डेयरी संचालक बोले-6.5 प्रतिशत फैट के हिसाब से दें दूधिए दूध
डेयरी संचालकों ने प्रशासन के समक्ष मांग रखी कि दूधिए 6.5 प्रतिशत फैट के हिसाब से दूध दें तो वह उन्हें 44 रुपए तक का दाम दें सकते हैं, क्योंकि जो दूधिए यहां दूध ला रहे हैं, उसमें 4 से 4.5 प्रतिशत फैट ही आ रहा है। ऐसे में वह उन्हें उनके दूध का सही दाम दे रहे हैं।
200 ग्राम मावा का सिस्टम शिवपुरी में
दूध डेयरी संचालकों का कहना है कि शिवपुरी में 200 ग्राम मावा के हिसाब से दूधिए दूध दे रहे हैं, जबकि मध्यप्रदेश कहीं भी मावा के हिसाब से नहीं बल्की फैट के हिसाब से दूध खरीदा जा रहा है और फैट के हिसाब से ही दूधियों को दाम दिए जा रहे हैं, जबकि शिवपुरी में यह परंपरा आज भी जारी है। अब दूधियों को फैट के हिसाब से दूध देना होगा, इसके लिए रणनीति तय की जाए।
सैंपल हो रहे फैल जुर्माना कौन भरे, दूधियों पर भी करो कार्रवाई
डेयरी संचालकों का कहना है कि अभी कुछ दिन पहले उनकी दुकानों से सैंपल लिए गए थे। सभी के सैंपल फेल हो गए हैं, क्योंकि दूध वाले पानी मिलाकर दे रहे हैं। इससे सैंपल फेल हो रहा है, जबकि डेयरी संचालक को जुर्माना भरना पड़ता है। इस पर खाद्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अब दूधियों का भी रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, उनके भी सैंपल भरे जाएंगे। यदि उनका सैंपल फेल होगा तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
फसल चौपट हो गई दाम तो बढ़ने चाहिए
दूधियों का कहना था कि पीना के दाम बढ़ गए हैं। हरे चारे के भी दाम बढ़े हुए हैं, ऐसे में अतिवर्षा के चलते उनकी फसलें खराब हो गई हैं। उनके पास रोजी रोटी का सहारा सिर्फ दूध ही है। ऐसे में उन्हें 35 रुपए में नुकसान ही रहता है। इसलिए वह दूध के दाम बढ़ाना चाहते हैं।
डेयरी संचालक बोले-हम प्लांट से मंगवा सकते हैं दूध, एसडीएम बोले-नहीं
डेयरी संचालक मनोज गुप्ता का कहना था कि उन्हें मिठाई आदि के लिए दूध चाहिए और वह प्लांट से दूध ला सकते हैं। एसडीएम ने कहा कि प्लांट से कोई दूध शहर में नहीं आएगा, क्योंकि प्लांट दूध को शहर में सप्लाई नहीं करता है। इस पर उनके मंसूबे ठंडे पड़ गए।
कोलारस, नरवर और करैरा से अधिक दामों पर खरीद रहे दूध
डेयरी संचालकों का कहना था कि करैरा, नरवर और कोलारस में दूध फैट के हिसाब से खरीदा जाता हैं, जबकि वह बिना फैट वाला दूध अधिक दाम पर खरीद रहे हैं। उनका कहना है कि 4 प्रतिशत फैट वाला दूध 26 से 28 रुपए में जाता है, जबकि 6 या उससे अधिक फैट वाला दूध 32 से 35 रुपए में मिलता है, जबकि यहां 4 या उससे अधिक फैट वाले दूध के हम 36 रुपए दाम दे रहे हैं।
दूधिए बोले-नहीं रोकेंगे दूध वालों को बांटें अपनी बंधी
दूधियों के 37 रुपए दाम होने के बाद पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष जंडेल गुर्जर ने हड़ताल खत्म करने की घोषणा की और कहा कि दूध वाले अब किसी भी दूधिए को शहर में आने से नहीं रोकेंगे। दूध वाले अपनी बंधी आज से बांटें। अब वह हलवाई और डेयरी वालों को दूध नहीं देंगे, बल्कि आम जनता को दूध की सप्लाई वे खुद करेंगे।
5 बजे लगी कतार, दोपहर में हो गया दूध खत्म
शाम को बैठक होने से पहले सुबह 5 बजे से सांची पार्लर पर भीड़ नजर आने लगी थी। 12 हजार पाउच मंगाए थे, जो दोपहर होते खत्म हो गए। इसके बाद पार्लर बंद हो गए। कुछ इलाकों से दूध के मनमाने दाम लेने की खबरें आईं तो वहीं दूध खत्म हो जाने के चलते चाय के होटल भी बंद हो गए, जबकि कुछ होटल वालों ने पैक्ड दूध की चाय बनाकर बेची।






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