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खेतों की जमीन में अवैध रूप से काट रहे कॉलोनियां, मूलभूत सुविधाएं भी नहीं | Shivpuri News

शिवपुरी। शहर व उससे सटे इलाकों में अवैध रूप से कॉलोनी काटने का काम तेजी से बढ़ रहा है। इन कॉलोनियों का रिकार्ड नगर परिषद के पास नहीं है। वहीं बिना स्वीकृति के काटी जा रही इन कॉलोनियों में चल रहे निर्माण कार्य को रोकने के लिए प्रशासनिक अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अवैध रूप से खेती की जमीन पर काटी जा रही इन कॉलोनियों में रहवासियों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती है।
यहां के रहवासी पेयजल, सड़क, बिजली, स्ट्रीट लाइट, सीवर लाइन आदि नहीं होने के कारण नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। खेती में कॉलोनी काटने के बाद कॉलोनाइजर्स भाग जाते हैं। प्लाॅट बेचने के पहले लोगों को बताई गई सुविधाएं भी नहीं दी जाती है। वहीं कई कॉलोनाइजर्स द्वारा लोगों से बिजली के खंबे लगाने के लिए पैसे भी लिए गए हैं। इसके बाद भी इन कॉलोनियों में आज भी लकड़ी की बल्लियों पर लटकी तारों के सहारे लोगों के बिजली कनेक्शन हुए हैं। 
कॉलोनियों में नहीं है मूलभूत सुविधाएं  
रेलवे स्टेशन रोड, केटीएम के पीछे, ग्वालियर वायपास, बालाजी धाम के पास, फोरलाइन वायपास व कठमई सहित अनेकों जगह में खेती की जमीन को कॉलोनाइजर्स द्वारा खरीद लिया गया। इसके बाद इन जमीनों में अवैध रूप से प्लाट काटकर मनचाही कीमत पर बेच दिया गया। प्लाट बेचने से पहले कॉलोनाइजर्स ने सड़क, नालियां, बिजली के खंबे, पार्क आदि सुविधाएं देने का लालच दिया था। लेकिन प्लॉट बेचने के बाद कॉलोनाइजर्स द्वारा यह सुविधाएं कॉलोनी में उपलब्ध नहीं कराई। इन क्षेत्र में 50 से लेकर 100 से अधिक मकान बन चुके हैं। वहीं कई मकानों का निर्माण किया जा रहा है।  
अवैध कॉलोनियों के निर्माण पर प्रशासन मौन
शहर से सटे आसपास के इलाके में बड़े पैमाने पर भू-कारोबारियों द्वारा कृषि भूमि खरीदकर आवासीय प्लॉटों का विक्रय धड़ल्ले से किया जा रहा है। शहर के नजदीक के क्षेत्र में काटी जा रही इन कॉलोनियों की न तो टीएनसीपी के तहत अनुमति ली गई है और न ही नगर पालिका व राजस्व विभाग के पास ऐसी कॉलोनी का कोई रिकॉर्ड है। िस्थति यह है कि बगैर डायवर्सन के काटी जा रही इन कॉलोनियों में लोगों को मनमाने दामों पर प्लॉट मुहैया कराए जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि जमीन कारोबारियों के इस कारोबार की भनक प्रशासन को न हो, लेकिन प्रशासन की मिलीभगत से जमीनों के कारोबार का यह काम भरपूर फल-फूल रहा है।
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