
सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित होंगे सजा के प्रावधान
शिवपुरी। बचपन को मानवीय विकारों के क्रूर साये से महफूज रखने के लिये जिला प्रशासन द्वारा बचपन रक्षक कार्यक्रम के तहत एक जिला स्तरीय कार्ययोजना तैयार की गई है। बच्चों के शोषण की बढ़ती घटनाएं वेहद चिंता का विषय बन चुकी है। हर दिन सैकड़ों बालक-बालिकाओं का यौन शोषण होता है। जिनमें से कुछ लोक अपवाद (सामाजिक छवि के धूमिल होने) के भय से शिकायत ही नहीं करते,जिससे अपराधियों का हौशला बढ़ता है। ऐसा नहीं है कि केवल बालिकाओं का ही शोषण होता हो,बालकों के यौन शोषण की घटनाएं भी लगभग समान ही होती है।किंतु बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि बालकों के यौन शोषण के मामले केवल अपवाद स्वरूप ही प्रकाश में आते है।
बाल संरक्षण अधिकारी राघवेन्द्र शर्मा ने बताया कि यौन अपराधों से बचपन की हिफाजत के लिये बना प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सैक्सुअल ऑफेंसेस (पोक्सो) कानून 18 वर्ष तक के प्रत्येक बालक-बालिका को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है।किंतु यह बेहद चिंता का विषय है कि लडकों के यौन शोषण के मामलों की शिकायतें उजागर नहीं हो पातीं।जिसका अपराधी फायदा उठाते है।
सजा की जानकारी से बदलेगा जनमानस
बाल यौन शोषण निरोधक पॉक्सो कानून के सजा के प्रावधानों को जिले के सभी सार्वजनिक स्थानों रेल्वे स्टेशन, बसस्टैंड,जनपद एवं जिला पंचायत कार्यालयों, स्कूलों, आंगनवाड़ी भवनों के साथ साथ मंदिरों पर भी फ्लैक्स के माध्यम से प्रदर्शित किया जायेग। अधिकारी शर्मा ने बताया कि अधिकांश मामलों में अपराधियों ने न्यायालयों में सजा के प्रावधानों की जानकारी न होने का जिक्र किया है। उनका तर्क था कि गंभीर सजा की जानकारी उन्हें होती तो वह यह अपराध नहीं करते।इसलिए उच्च न्यायालय की निगरानी समिति द्वारा सजा के प्रावधानों को सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित करने के निर्देश दिये गए है।उल्लेखनीय है कि बच्चों से जुड़े हुए कानूनों की समीक्षा के लिये उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय में प्रथक से समिति गठित है जो बाल कानूनों के क्रियान्वयन की मासिक रूप से निगरानी करती है।
जिला प्रशासन की नई पहल
जिले में बाल यौन शोषण के बढ़ते ग्राफ को कम करने के लिये कानूनी प्रावधानों से जन मानस को परिचित कराने के लिये जिला प्रशासन शासकीय एवं अशासकीय सभी स्कूलों एवं छात्रावासों में चुप न रहें मां से कहें कैम्पेन के तहत बालक-बालिकाओं को अपराधों की खिलाफत करने के लिये प्रेरित करेगा,तथा दूसरी ओर पुरुष वर्ग से एक संकल्प बचपन की सुरक्षा का अतंर्गत हस्ताक्षर अभियान चलाकर बाल अनुकूल वातावरण का निर्माण करेगा।इस अभियान में लोगों से संकल्प पत्र भी भरवाए जाएंगे।
इनका कहना हैं
सामाजिक छवि के धूमिल होने के भय से अधिकतर लोग बाल यौन शोषण की शिकायत नहीं करते। जबकि कानून में पीडि़त एवं उसके परिवार की पहचान गोपनीय रखे जाने का प्रावधान है। यदि पीडि़ता की पहचान किसी भी तरह से कोई उजागर करता है,तो उसके लिये भी कानून में कठोर सजा का प्रावधान है।
डॉ.अजय खेमरिया, अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति, शिवपुरी
जिले से सामाजिक बुराई को समाप्त करेंगे
बचपन की असुरक्षा का मूल कारण नैतिकता का पतन है। परिजनों के उपेक्षित व्यवहार एवं दूषित मानवीय विचारों के कारण ही आज बच्चों का शोषण हो रहा है। बच्चे अपने विकास एवं सुरक्षा के लिये दूसरों पर निर्भर होते है,इसलिए समाज के हर व्यक्ति को उनकी सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिये। जिला प्रशासन द्वारा बचपन रक्षक कार्यक्रम के तहत एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार की गई है। जनचेतना के माध्यम से इस बुराई को समाप्त करेंगे।
ओपी पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास, शिवपुरी






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