Press "Enter" to skip to content

मेडीकल कॉलेज और अस्पताल के अधिकारियों की जंग में पिसते मरीज | Shivpuri News


*- चिकित्सालय में पर्याप्त जगह होने के वाबजूद जमीन पर पड़े हैं मरीज*

*शिवपुरी ब्यूरो।* जिला चिकित्सालय एवं मेडीकल कॉलेज के अधिकारियों की आपसी खींचतान का खामियाजा चिकित्सालय में आने वाले मरीजों को भुगतान पड़ रहा हैं। जिला चिकित्सालय के अधिकारी कहते हैं कि मेडीकल कॉलेज के चिकित्सक सहयोग नहीं कर रहे हैं। वहीं मेडीकल कॉलेज के अधिकारी का कहना है कि हमारे यहां से पांच दर्जन से अधिक चिकित्सक जिला चिकित्सालय में अपनी सेवायें दे रहे हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि कौन सही बोल रहा हैं तथाा कौन गलत बोल रहा हैं। यहां तक की ओपीडी में भी चिकित्सकों का अभाव बना हुआ हैं। बड़े अधिकारियों की आपसी जंग में जिला चिकित्सालय में उपचार करा रहे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। ग्रीष्म ऋतु के प्रारंभ होने के साथ में जिला चिकित्सालय में इलाज कराने आने वाले मरीजों में लगातार वृद्धि हो रही हैं। लेकिन जिला चिकित्सालय की अव्यवस्थाओं के चलते रोगियों को दर-दर की ठोकरें खाने को विवश होना पड़ रहा हैं। मध्य प्रदेश में प्रथम स्थान पाने वाले जिला चिकित्सालय में जब ये आलम बना हुआ हैं तब क्षेत्रीय चिकित्सालयों में क्या आलम होगा। इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

*मेडीकल वार्ड में क्षमता से अधिक भर्ती हैं मरीज

जिला चिकित्सालय में इन दिनों भीषण गर्मी के मौसम में मौसमी बीमारियों के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही हैं। मेडीकल वार्ड में 90 विस्तरों के व्यवस्था हैं जबकि मेडीकल वार्ड में लगभग 150 के करीब मरीज भर्ती हैं। पलंगों की कमी के कारण रोगियों को मजबूरन जमीन पर पड़े रहना पड़ रहा हैं। यहां बताना होगा की शिवपुरी जिला चिकित्सालय को मेडीकल कॉलेज के संयुक्त उपचार के लिए जोड़ लिया गया हैं। जिसमें कई वार्ड एवं पलंग खाली पड़े हुए हैं। लेकिन इसके वावजूद भी रोगियों को इसकी सुविधा नहीं उपलब्ध हो पा रही हैं। जबकि मरीजों के उपचार हेतु मेडीकल कॉलेज चिकित्सकों को ही प्रभारी बनाया गया हैं तब फिर शासन द्वारा करोड़ों रूपए व्यय कर बनाए गए वार्डों का क्या मतलब रह जाता है?

*मेडीकल कॉलेज के चिकित्सक कागजों में दे रहे हें सेवायें*

मेडीकल कॉलेज के प्रभारी के वी वर्मा ने बताया है कि जिला चिकित्सालय में 40 एमबीबीएस व 23 कंस्लटेंट चिकित्सक अपनी सेवायें दे रहे हैं। लेकिन जिला चिकित्सालय में डॉ. प्रीति निगोतिया व रीतेश यादव के साथ एक या दो डॉक्टर और अपनी सेवायें दे रहे हैं। जबकि कई मेडीकल कॉलेंज के चिकित्सकों की ड्यूटी ओपीडी में बैठने की लगाई गई हैं वह वहां बैठ कर मरीजों का उपचार नहीं कर पा रहे हैं।

*विवाद की जड़ बने एमएलसी केस*

जिला चिकित्सा एमएलसी के लिए पांच चिकित्सक डॉ. पंकज गुप्ता, डा. आरएस रावत, डॉ. एसके पिप्ल, डॉ. दिनेश राजपूत, डॉ. सुनील सिंह अधिकृत रूप से पदस्थ हैं। जो अपने दायित्व का निर्वर्हन कर रहे हैं। वहीं मेडीकल कॉलेज 23 कंस्लटेंट और 40 एमबीबीएस डॉक्टर जिला चिकित्सालय में अपनी सेवा में तो दे रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि हम तो अनुबंध पर अपनी सेवायें जिला चिकित्सालय में दे रहे हैं हम एमएलसी क्यों बनाऐं। जबकि जिला चिकित्सालय प्रबंधन का कहना है कि जब जिला चिकित्सालय में ये चिकित्सक अपनी सेवायें दे रहे हैं तो एम.एल.सी बनाने में कौन सी आपत्ति हैं।

More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!