
– सरकारी पैसे से करा दिए गए विकास के काम
– कई अवैध कॉलोनी में पानी, सीवर और बिजली के खंभे कैसे पहुंचे
शिवपुरी- शिवपुरी शहर में बनी 150 से अधिक अवैध कॉलोनियों में से कईयों में नियमविरूद्ध तरीके से आज सिंध परियोजना के तहत पानी की लाइन, बिजली के खंभे और सीवर प्रोजेक्ट के तहत सीवर लाइन डाल दी गई है। अब सवाल यह उठ रहा है कि इन चिंहित अवैध कॉलोनियों में सरकारी बजट से यह विकास काम कैसे हो गए। यदि यह कॉलोनियों पहले से नपा और राजस्व विभाग द्वारा अवैध कॉलोनी के रूप में चिंहित थीं तो यहां पर विकास कार्य के लिए जो सरकारी पैसा खर्च किया गया वह किस के आदेश व निर्देश से यहां पर खर्च किया गया। कुल मिलाकर प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से पिछले 20 सालों में शहर में अवैध कॉलोनियों को जाल बुना गया है। जिसमें कुछ चिंहित भू-माफियाओं के साथ राजस्व विभाग के पटवारी, एसडीएम ऑफिस के कुछ कर्ताधर्ता, नपा के अधिकारी-कर्मचारी और पीएचई के लोग इसमें शामिल रहे हैं। पूर्व में जो 150 अवैध कॉलोनियों को चिंहित करने का दावा नपा और राजस्व विभाग के अधिकारी करते हैं उनके द्वारा केवल नोटिस जारी करने और इसके बाद मामला सेटिंग कर उसे निपटाने तक सीमित रहा है इसलिए पूरे शहर में धीरे-धीरे अवैध कॉलोनियों को जाल बनता चला गया।
सरकारी योजनाओं का दुरूपयोग-
शहर में निष्पक्ष जांच हो तो ग्वालियर बायपास, पोहरी रोड, रेलवे स्टेशन रोड, मनियर, सोन चिरैया होटल के सामने द्वारकापुरी, खिन्नीनाका, विवेकानंद, सिटी सेंटर, हाथीखाना, विजयपुरम, झांसी रोड, गुना बायपास, फतेहपुर पर जो अवैध कॉलोनियों भूमाफियाओं ने बनाई। वहां पर सबसे पहले सिंध परियोजना के तहत पानी की लाइन, बिजली के खंभे और सीवर प्रोजेक्ट के तहत सीवर लाइन डाल दी गई हैं। जबकि शहर के मुख्य पुरानी बस्तियां जैसे सदर बाजार, न्यू ब्लॉक, आर्य समाज रोड, माधव चौक, महल कॉलोनी, कमलागंज, गांधी कॉलोनी आदि क्षेत्र में पानी और सीवर के प्रोजेक्ट आज तक अधूरे हैं। बताया जाता है कि भूमाफियाओं ने सेटिंग की और बिजली के खंभे, लाल मुरम की सड़कें इसके बाद सीवर और पानी की लाइन डालने का काम अफसरों ने किया है।
जांच के बाद वसूली होनी चाहिए-
वैसे जिन अफसरों ने अवैध कॉलोनियों में सिंध परियोजना के तहत पानी की लाइन, बिजली के खंभे और सीवर प्रोजेक्ट के तहत सीवर लाइन डाली है उनसे अवैध कॉलोनियों में नियमविरूद्ध विकास कार्य कराने के लिए एवज में कार्रवाई कर उनसे सरकारी पैसे की वसूली होना चाहिए। नियमविरूद्ध अफसरों ने सरकारी धन का दुरूपयोग किया और कुछ चिंहित भूमाफियाओं को इससे लाभ पहुंचाया गया है।






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