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शिवपुरी में संवेदनशील पुलिसिंग का अनूठा मामला : जिसे किया जा रहा था घर से बेघर उसे मिले जीवन यापन को छह लाख | Shivpuri News

परिवार परामर्श केंद्र ने मध्यस्थता कर सुलझाया विवाद
एचआईवी ग्रसित पति की मौत के बाद दरबदर हो गई थी महिला
शिवपुरी। शिवपुरी संवेदनशील पुलिसिंग का अनूठा मामला सामने आया है जिसमें एसपी राजेशसिंह चंदेल के मार्गदर्शन में महिला अपराध प्रकोष्ठ और परिवार परामर्श केंद्र द्वारा की गई काउंसलिंग से एक बेवा को 6 लाख  की राशि तो मिली ही साथ ही साथ उसके और ससुराली जनों के बीच चल रहा आपसी विवाद भी सामंजस्य के साथ निराकृत हो गया। यह महिला एचआईवी पीड़ित की पत्नी हो कर दो बच्चों की मां है जिसके पति की मौत एचआईवी संक्रमण के कारण पूर्व में ही हो चुकी है।
यह कहानी कुछ इस प्रकार है महिला ने अपने शिकायती आवेदन में एसपी को बताया कि उसके पति की एचआईवी संक्रमण के कारण मृत्यु हो चुकी है उसके बाद से उसके ससुराली जन उसे और उसके दोनों नाबालिग बच्चों को न केवल मारपीट कर प्रताड़ित कर रहे हैं बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी प्रताड़ना दी जाकर घर से बाहर किया जा रहा है। महिला ने यह आवेदन पूर्व में फिजिकल पुलिस थाने में 17 मई एवं 31 मई को दिया जिस पर से अदम चेक की कायमी की गई। मगर इनका पारिवारिक विवाद और बढ़ता चला गया जब यह कहानी एसपी राजेश सिंह चंदेल के संज्ञान में आई तो उन्होंने इस प्रकरण को डीएसपी गजेंद्र को निराकरण हेतु सौंपा। स्थिति यह थी कि महिला अपने दो नाबालिग बच्चों के साथ ससुराल रहना चाहती थी लेकिन ससुराली जन उसे एड्स के कारण किसी भी कीमत पर रखने को तैयार नहीं थे। 
महिला सेल और परिवार परामर्श केंद्र ने निभाई समझौते में भूमिका 
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों को परिवार परामर्श केंद्र में तलब किया गया। 3 जून को परिवार परामर्श समिति की बैठक में यह मामला आया जिसमें दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखें और महिला प्रकोष्ठ एवं परिवार परामर्श केंद्र के जिला संयोजक आलोक एम इंदौरिया एवं परामर्श दाताओं ने दोनों पक्षों से बीच का हल निकालने पर जोर दिया जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया। एचआईवी पीड़ित की बेवा के ससुर की संपत्ति का आकलन किया गया जो लगभग 30 लाख आंकी गई और उसके 6 वारिस भी बताए गए। इन परिस्थितियों में जबकि ससुराली जन उसे रखने को तैयार नहीं थे तब तय हुआ कि मृतक के हिस्से की 6 लाख की राशि उसकी बेवा को दिलाई जाए और जब तक यह राशि उसे नहीं मिल जाती तब तक उसे ससुराल में ही शांतिपूर्ण ढंग से बच्चों के साथ रहने दिया जाए। महिला अपराध प्रकोष्ठ प्रभारी तथा परिवार परामर्श केंद्र के परामर्शदाता ने दोनों पक्षों को 3 माह के भीतर समझौता अनुसार रकम के लेनदेन पर राजी कर लिया। गत माह दोनों पक्षों के बीच राजीनामा हुआ और 2 लाख का चेक महिला एवं उसके दोनों नाबालिग पुत्रों के नाम से 2 लाख की एफडीआर के माध्यम से कुल 6 लाख की राशि इस पीड़िता को दिलाई गई।इस प्रकरण को निपटाने में परामर्श केंद्र की सदस्य गीता दीवान, समीर गांधी, संतोष शिवहरे, उमा मिश्रा, डाॅ. खुशी खान, पुष्पा खरे व महिला अपराध प्रकोष्ठ प्रभारी उपनिरीक्षक दीप्ति तोमर तथा आरक्षक विपिन शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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