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पिता भृत्य, दिव्यांग बेटे ने डिप्टी कलेक्टर बनकर बढ़ाया मान-shivpuri news

अध्यापक रहते हुए की तैयारी, पहले पीओ बने फिर भी जारी रखी पढ़ाई, अब डिप्टी कलेक्टर
शिवपुरी। जीवन में यदि लक्ष्य को पाने का जुनून हो तो फिर कोई भी प्रतिकूल परिस्थियां आड़े नहीं सकती। ऐसा ही साहस शिवपुरी के होनहार विजय यादव ने दिखाया है। जन्मजात दिव्यांग, उस पर परिवार की माली हालत भी बेहद सामान्य, पिता शिक्षा विभाग में भृत्य, लेकिन विजय ने कभी भी अपने लक्ष्य के आड़े परिस्थियों को नहीं आने दिया और इस बार पीएससी में उन्होंने दिव्यांग वर्ग में प्रदेश में पहली, ओबीसी वर्ग में 8वीं जबकि सामान्य में 24वीं रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर का सर्वोच्च पद प्राप्त कर लिया। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ दोस्त परिजन भी फर्क महसूस कर रहे हैं। 
तीन बार बने अध्यापक, फिर पीओ अब डिप्टी कलेक्टर
विजय के संघर्ष और लक्ष्य को पाने की कहानी भी बेहद प्रेरित करने वाली है। 2009 में उनका चयन संविदा वर्ग-1 में हुआ और सीधी जिले के स्यावल में पोस्टिंग मिली। वैशाखी के सहारे चलने वाले विजय ने यहां 2011 तक सेवाएं दी। इसके बाद पारिवारिक जिम्मेदारी के चलते साल 2011 में संविदा शिक्षक वर्ग-2 में शिवपुरी जिले में चयनित हुए और हाइवे िस्थत इंदरगढ़ स्कूल में पदस्थ रहे। इस दौरान उन्होंने पीएससी की तैयारी अपने स्तर पर जारी रखी। साल 2012 में विजय संविदा शिक्षक वर्ग-1 की परीक्षा में एमपी में पहले नंबर पर आए, लेकिन पोस्टिंग राजगढ़ जिले में मिली। इसलिए ज्वाइन नहीं किया। एमएससी बॉटनी से करने वाले विजय ने वॉटनी विषय से ही पीएससी की परीक्षा दी जिसे आमतौर पर कठिन विषय माना जाता है। साल 2013 में उनका पीओ के पद पर पीएससी से चयन हुआ और छतरपुर के नौ-गांव में पोस्टिंग हुई। यहां से वे अशोकनगर स्थानांतरित हो गए। यहां वे वर्तमान में पदस्थ हैं। 
प्रोफेसर और एसडीएम ने दी प्रेरणा, फिर शुरू की तैयारी, हुआ चयन
विजय बताते हैं कि साल 2002 में पीएससी की नि:शुल्क कोचिंग पढ़ाने वाले स्व. प्रो. चंद्रपालसिंह सिकरवार ने उन्हें प्रेरित किया, इसके बाद अशोक नगर में पीओ रहते हुए वहां के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर अखिलेश जैन ने उन्हें प्रेरणा दी जिसके बाद उन्होंने युवाओं को पीएससी की नि:शुल्क कोचिंग देना शुरू किया। करीब 3 साल तक उन्होंने बच्चों को पीएससी की तैयारी कराने पर ही फोकस किया। इसके बाद साल 2016 में पीएससी की मुख्य परीक्षा में पहुंचकर असफल हुए। फिर 2017 में एक और असफलता मिली, लेकिन वे नहीं हारे और 2018 में पीएससी के सर्वोच्च पद डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हो गए।
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