
हजारों पेड़ों की हत्या करने वाले हत्यारे आज भी कार्यवाही से वंचित
करैरा से बामोरकला सड़क चौडीकरण निर्माण में बाधक कटे हुए पेड़ों पर उपजते सवाल
शिवपुरी। जिला में करेरा से बामोरकला तक लोक निर्माण बिभाग द्वारा जो सड़क का निर्माण किया जा रहा है उसमें बामौर डामरोन से खेराई तक बड़ी संख्या में हरे भरे वृक्षों की अबैध कटाई के मामले की जांच में जो लीपापोती की गई उससे कुछ सुलगते सबाल उपजे वो इस प्रकार है? सवाल उठता है कि सड़क स्वीकृत होने के बाद सड़क चौडीकरण में बाधक बन भारी मात्रा में खड़े पेड़ो की अनुमति क्यों नही दिलाई गई ? सड़क चौडीकरण से पहले जो बामोर डामरोन से खेराई के बीच जो बड़ी संख्या में हरे भरे बृक्ष खड़े थे वो आखिर कहा गए। अगर पीडब्ल्यूडी ये मानती है कि ये पेड़ ग्रामीणों ने काटे है तो ये बात सिद्ध हो गयी कि पेड़ खड़े थे और पेड़ थे तो निर्माण कंपनी को परमिशन क्यों नही दिलाई गई ट्री कटिंग की। सड़क चौडीकरण में जितनी भूमि आबंटित सड़क एजेंसी को दी जाती है उसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी बिभाग और एजेंसी की होती है। जब सड़क निर्माण में बाधक बन हजारों पेड़ ग्रामीणों ने काट दिए तो बिभाग द्वारा ग्रामीणों के खिलाफ शासकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने की कार्यवाही क्यों नही की गई। ग्रामीणों के अनुसार बाधक बन रहे इन पेड़ों को आर के जैन कंपनी ने मशीनों से गिरा दिया गया और फिर ग्रामीणों से बोल दिया कि काट लो। जितने बड़े बड़े पेड़ जड़ों से उखाड़े गए है वो ग्रामीण नहीं उखाड़ सकते उन्हें मशीन से ही निकाला गया है जो आज भी वहां यथावत पड़े हुए है। सड़क निर्माण में बाधक बन पेड़ ग्रामीणों के द्वारा कटते रहे और फिर उन्हें कम्पनी के रोड से हटाकर सड़क निर्माण शुरू कर दिया मतलब बिना अनुमति सड़क का काम शुरू किया पीडब्ल्यूडी बिभाग की निष्क्रियता से। सड़क चौडीकरण में बाधक बन बृक्षों की परमिशन हुई नही और पीडब्ल्यूडी की निगरानी में शासकीय बृक्ष कटते रहे और बिभाग चुप रहा और जब तक चुप रहा तब तक परमिशन वाले बृक्षों की जगह बृक्षों की जगह साफ न कर दी गयी। निगरानी बिभाग का शांत रहना अपने आप मे ये सिद्ध करता है कि निगरानी बिभाग ने कंपनी को बिना बृक्षों की परमिशन बृक्षों को ग्रामीणों से कटबाकर रोड डालने की इजाजत दी।
नियमों को दरकिनार कर दी हजारों पेड़ों की बली, निष्पक्ष जांच में होगा मामला उजागर
सरकार ने विकास की दृष्टि से जिनको निगरानी का कार्य सोपा है उन्होंने ही इस बड़े मामले में नियमों को दरकिनार कर कम्पनी को लाभ पहुँचाया क्योंकि जब तक सड़क चौडीकरण में बाधक बन पेड़ों की अनुमति नही ली जाती तब तक सड़क का कार्य या पेड़ो की कटाई सम्भव नही थी इसलिए कंपनी और बिभाग ने दबंगई अपनाते हुए बिना अनुमति पेड़ो को मशीन से उखाड़कर गिरा दिया और फिर ग्रामीणों से काटकर ले जाने का बोल दिया इससे काम भी हो गया और ठीकरा ग्रामीणों के माथे मड़ दिया गया।
ग्राम पंचायत और हल्का पटवारी की भूमिका संदिग्ध
इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा गया है और विभाग चुप रहा। तब तक चुप रहा जब तक कि रोड से बाधक बन रहे पेड़ साफ न हो गए इसलिए पेड़ कटाई के दौरान बिभाग और कंपनी ने ग्रामीणों के खिलाफ पेड़ काटने का मामला की शिकायत नही की। ग्राम पंचायत और हल्का पटवारी की ने भी किया इस मामले को नजर अंदाज।






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