
विजयधर्मसूरी महाराज की सौवी पूण्यतिथि भव्ययता के साथ मनाने पर किया विचार
शिवपुरी।
शास्त्र विशारद जगत पूज्य आचार्य श्रीविजयधर्मसूरी जी महाराज साहब की
परंपरा के संत श्रीविजय कुलचंदसूरीश्वर के सी महाराज ठाणा तीन का भव्य
मांगलिक प्रवेश आज शिवपुरी में हुआ, वे कोटा से विहार कर शिवपुरी पधारे है
उनके आगमन पर भव्य बरगोडा निकाला गया।
विगत दिवस 21 जनवरी को महाराज जी के
द्वारा समाधीमंदिर पर क्षेत्रपालदेव पूजन का आयोजन किया गया था। अगले तीन
दिनों को कार्यक्रम में आज जैन श्वेताम्बर मंदिर पर भव्य प्रवेश जुलूस
दिनांक 23 जनवरी को श्री गौतम लब्धि अनुष्ठान एवं 24 जनवरी को श्री वर्धमान
शक्रस्तव अभिषेक महाविधान रखा गया है।
जानकारी देते हुये कार्यकारी
अध्यक्ष तेजमल सांखला ने बताया कि लगभग 98 वर्ष पूर्व श्रीविजय
धर्मसूरीश्वर महाराज जी ने शिवपुरी की पावन नगरी पर देहत्याग किया था और
उनकी भक्तों द्वारा उनकी समाधी बनवाई थी जिसे आज हम विजयधर्मसूरी समाधी
मंदिर के नाम से जानते है। प्रतिवर्ष उक्त स्थल पर भव्य पूजा का आयोजन किया
जाता है।
अगामी वर्षो में उनकी सौ वी पूण्यतिथि शिवपुरी के उक्त स्थल पर
मनाने की मंशा के साथ उन्ही के पट्टधर गुरूभगवन्त का शिवपुरी में प्रवेश
हुआ है। महाराज जी के इस आगमन पर आज भव्य बरघोडा अशोक मुन्हानी परिवार के
निवास स्थल से निकाला गया जो सदर बाजार होते हुये मंदिर पहुंचा।
जहां
गुरूदेव के प्रवचन कार्यक्रम समपन्न हुये। प्रवचन की के साथ ही महाराज जी
की कावली की बोली लगाई गई जिसका लाभ यशंवत सांड परिवार द्वारा लिया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में महिला मण्डल की अरूणा सांखला, सुमिता कोचेटा,
कुसम जैन, अल्पा सांखला द्वारा स्वागत गीत गाया। आचार्य भगवन्त के प्रवेश
पर समाज के परिवारों द्वारा अपने निवास स्थल के बाहर गहुली बनाकर उनका
आशीर्वाद लिया।
व्हीटीपी पर भव्यता के साथ मनेगी विजयधर्मसूरी महाराज की सौवी पुण्यतिथि
शिवपुरी
में शास्त्रविशारद जैनाचार्य विजयधर्मसूरि जी का देवलोक भाद्रपक्ष शुक्ल
14 को अगस्त वर्ष 1922 को हुआ जिनका भव्य समाधी स्थल बना है इस समाधी स्थल
पर प्रतिवर्ष उनकी पूण्य तिथि मनाई जाती है और प्रतिवर्ष सौभाग्यमल
नगीनकुमार कोठारी परिवार ग्वालियर द्वारा स्वाधर्मी वात्सल्य रखा जाता है।
आचार्य विजयेन्द्रसूरि के अथक प्रयासों से शीघ्र समाधी मंदिर का निर्माण
समपन्न हुआ और उनकी प्रतीमा की स्थापना की गई साथ ही सुमिति नाथ भगवान का
मंदिर भी बनाया गया जिसकी ध्वजा का कार्यक्रम प्रतिवर्ष कोठारी परिवार एवं
भंसाली परिवार द्वारा समन्न होता है।
उक्त गुरू के पूण्य स्मृति में
प्रतिवर्ष मनाये जाने वाले इस कार्यक्रम के सौवे वर्ष को भव्यवता के साथ
मनाने का आग्रह उनके पट्टधर शिष्य कुलचंदसूरीश्वर जी महाराज जिन्हे मूल रूप
से केसी महाराज के नाम पहचाना जाता है ने किया। वे जयपुर चातुमार्स कर
शिवपुरी पधारे और उनका अगला चातुर्मास दिल्ली तय हुआ है। 2022 को मनाये
जाने वाले इस भव्य कार्यक्रम के लिये उनसे 2022 के चातुर्मास की विनती भी
जैन समाज द्वारा की गई।






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