शिवपुरी। विधानसभा उपचुनाव में ग्वालियर चंबल संभाग की 16 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। जिसके लिए शिवपुरी जिले से दो सीटों पर करेरा और पोहरी में चुनाव होना है कांग्रेस पार्टी इन सभी सीटों पर जीताऊ प्रत्याशी की खोज में है। और यह क्षेत्र पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया का है जब वह कांग्रेस में थे तो इन सीटों प्रत्याशी उतारने के लिए सिंधिया की महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी अब वह भाजपा में शामिल हो गए हैं लेकिन कांग्रेस ऐसे प्रत्याशीयो की खोज में है कि इन सीटों पर कांग्रेस का कब्जा हो ,परंतु यह होना असम्भव है।
पोहरी विधानसभा क्षेत्र की बात की जाए तो वहां से कांग्रेस पार्टी किस प्रत्याशी को मैदान में उतार सकती है पूर्व विधायक हरिवल्भ शुक्ला, कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री रामनिवास रावत, पोहरी जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रदुम्न वर्मा या बसपा पूर्व प्रत्याशी कैलाश कुशवाह इनमें से कांग्रेस किसी एक को मैदान में उतार सकती है हरिवलल्भ शुक्ला जो कि पोहरी से पूर्व में विधायक रहे थे वह ब्राह्मण समाज से आते हैं और पोहरी में ब्राह्मण समाज का वोट 12 हजार के लगभग है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इनका टिकट काट दिया था और उनकी जगह पर कांग्रेस ने सुरेश राठखेडा को अपना उम्मीदवार बनाया। क्योंकि वहां धाकड़ समाज का अच्छा खासा वोट बैंक है। इसका फायदा उन्हें मिला और वह 7 हजार से अधिक मतों से जीते थे वहीं दूसरी ओर बसपा प्रत्याशी कैलाश कुशवाह दूसरे स्थान पर आएं थे। पूर्व मंत्री रामनिवास रावत की बात की जाए तो पोहरी विधानसभा क्षेत्र में बाहरी प्रत्याशी के रूप में साबित होंगे और वह वहां से भाजपा प्रत्याशी को चुनौती नहीं दे पाएंगे क्योंकि यह क्षेत्र उनको अलग लगेगा और एक दम वह जनता जनार्दन से सम्पर्क भी नहीं कर पाएंगे। प्रदुम्न वर्मा की बात की जाए तो यह पहले सिंधिया समर्थक रहे हैं परन्तु टिकट मिलने के कारण यह सिंधिया के साथ नहीं गये। यह पोहरी जनपद पंचायत अध्यक्ष है और इनका पोहरी विधानसभा क्षेत्र में अच्छा सम्पर्क है। धाकड़ समाज को साधने के लिए इनको टिकट दे सकतीं हैं कांग्रेस। परंतु दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी सुरेश राठखेडा है जो कि धाकड़ समाज से आते हैं और पूर्व में पोहरी से विधायक भी रहे हैं अब उनको शिवराज सरकार ने लोक निर्माण विभाग का राज्यमंत्री बना दिया है धाकड़ बाहुल्य को लुभाने के लिए उनके पास मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया है धाकड़ बाहुल्य पूरी तरह से भाजपा के पास है क्योंकि पूर्व विधायक प्रहलाद भारती भी भाजपा में हैं संभव नहीं है सुरेश राठखेडा को चुनौती दे पाएंगे प्रदुम्न वर्मा।
हम बात करें कैलाश कुशवाह की तों वह पहले भाजपा में थे और शिवपुरी कृषि उपज मंडी समिति के उपाध्यक्ष भी थे उन्होंने अपनी भतीजी बहू को जिला पंचायत सदस्य चुनाव लड़वाया और उन्होंने जीत दर्ज भी की। वह अपनी समाज मजबूत पकड़ रखते हैं और उनको कुशवाह समाज का बड़ा नेता माना जाता हैं साथ में उनकी दलित समुदाय में पकड़ अच्छी खासी पकड़ है। इन्हीं के बलबूते पर वह चुनावी मैदान में उतरे थे। उन्होंने नामात्र छः महीने में तैयारी कर ली और भाजपा से बगावत कर बसपा से टिकट लाकर उन्होंने चुनाव लडा था। और उन्हें 50 हजार से अधिक वोट मिले थे उनका प्रचार प्रसार छः माह का था उसमें उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी प्रहलाद भारती को तीसरे नंबर पर ढकेल दिया।
पोहरी विधानसभा क्षेत्र में कुशवाह समाज का वोट 25 हजार हैं ,और जाटव समाज का वोट 20 हजार से अधिक है उनको कुशवाह और दलित समुदाय का वोट अच्छा खासा मिला था।
अब बात करें उपचुनाव की तो कांग्रेस कैलाश कुशवाह पर दांव खेल सकतीं हैं कुशवाह और दलित समाज के वोट बैंक को लुभाने के लिए क्योंकि यह दोनों का वोट बैंक 50 हजार के लगभग है। कैलाश कुशवाह की अपनी समाज में और अनुसूचित जाति और जनजाति समाज में अच्छी खासी पकड़ है इसका फायदा उन्हें कांग्रेस में मिल सकता हैं। क्योंकि वह एक जीताऊ प्रत्याशी के रूप में उभरेंगे ,कांग्रेस को साथ में करेरा विधानसभा क्षेत्र को भी फायदा मिलेगा क्योंकि वहां भी कुशवाह समाज का वोट है देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस बसपा के पूर्व प्रत्याशी कैलाश कुशवाह पर दांव लगा सकतीं हैं।






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