शिवपुरी: पानी की गुणवत्ता को लेकर देशभर में लंबे समय से शोध कर रहे आईआईटी मुंबई के इंजीनियर यतेंद्र अग्रवाल मंगलवार को शिवपुरी पहुंचे जहां उन्होंने करैरा और नरवर के गावों में अगल-अलग स्त्रोतों के पानी की जांच की। करैरा के घसारही और नरवर के हतैड़ा, जरावनी आदि गांव में पानी में फ्लोराइड की मात्रा घातक स्तर पर पाई गई। इस दौरान इंजीनियर यतेंद्र अग्रवाल ने ग्रामीणों को इसका समाधान बताया।
उन्होंने बताया कि वे देशभर में कई हिस्सों में पानी में फ्लोराइड, आयरन, आर्सेनिक आदि की परेशानी को लेकर अध्ययन कर चुके हैं। जब बड़े ट्रीटमेंट प्लांट्स का अध्ययन किया तो समझ आया कि एक्टिवेटेड एलुमिना के जरिए फ्लोराइड की समस्या का समाधान किया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने मौके पर ही ग्रामीणों को पानी में फ्लोराइड की मात्रा दिखाई।
बता दें कि करैरा और नरवर क्षेत्र में ऐसे कई गांव हैं जहां पर पानी में फ्लोराइड की मात्रा घातक स्तर से भी अधिक है। इन गावों के ग्रामीण वर्षों से फ्लोराइड युक्त पानी पी रहे हैं जिसके कारण इनकी हड्डियां कमजोर हो गई हैं। कई गांव में बच्चों के पैर और दांत तक टेढ़े हो गए हैं। करैरा विधानसभा में आने वाले घसारही, हतैड़ा, फूलपुर, दौनी, जरावनी, मियाओरा आदि कई गांव हैं जहां पर फ्लोराइड का स्तर तीन से अधिक है। यहां कई गांव में नल-जल योजना तो पहुंच गई है, लेकिन नलों में पानी नहीं आता है।
कई बार अधिकारी आए तो कभी कोई सामाजिक संस्था, लेकिन इनकी समस्या का समाधान लेकर कोई नहीं आ पाया। गांव में छोटे-छोटे फिल्टर प्लांट लगाए गए, लेकिन वह कुछ समय बाद चलकर खराब हो गए और अब फिर ग्रामीण फ्लोराइड का पानी पी रहे हैं। गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि हमारी उम्र तो जैसे-तेसे गुजर गई, लेकिन अब नई पीढ़ी की चिंता होती है क्योंकि अभी से बच्चों को
कई तरह की परेशानियां आने लगी हैं। घसारई में 25 लोगों की बकायदा सूची भी लगी हुई है कि यह लोग फ्लोरोसिस बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में दांतों में अधिक पीलापन, हाथ और पैर का आगे या पीछे की ओर मुड़ जाना, घुटनों के आसपास सूजन, झुकने या बैठने में परेशानी, जोड़ों में दर्द और पेट भारी रहना जैसी परेशानियां आती हैं।
यतेंद्र अग्रवाल ने बताया कि उत्तरप्रदेश के सोनभद्र और महाराष्ट्र के नांदेड़ में भी इसी तरह की समस्या थी और वहां पर एक्टिवेटेड एलुमिना से समाधान मिला है। उन्होंने बताया कि इस सिस्टम में एक बाल्टी में टेराफिल फिल्टर लगाया जाता है। उसी बाल्टी में तीन किलो एक्टिवेटेड एलुमिना डाला जाता है। एक्टिवेटेड एलुमिना फ्लोराइड को पानी से खींच लेता है। वहीं फिल्टर पानी को साफ कर देता है और उसे पीने योग्य बनाता है। इस सिस्टम को हर घर में लगाया जा सकता है और यह काफी किफायती भी पड़ता है।

मुंबई के इंजीनियर ने की पानी की जांच: फ्लोराइड की मात्रा मिली ज्यादा, हड्डी होती हैं कमजोर / Shivpuri News
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