शिवपुरी: जल जीवन मिशन के तहत भारत सरकार शिवपुरी जिले के 841 गांव और बदरवास नगर में सिंध के पानी की घर-घर सप्लाई के लिए बड़ा प्रोजेक्ट लाई है। लेकिन फॉरेस्ट की परमिशन की वजह से जनहितैषी प्रोजेक्ट लगातार पिछड़ता नजर आ रहा है। दरअसल मड़ीखेड़ा बांध पर इंटेकवेल निर्माण की अनुमति के लिए फॉरेस्ट ने स्टेज-1 की अनुमति में पहले से ही काफी देरी कर दी है, अब स्टेज-2 की अनुमति में फिर से देरी की जा रही है।
मड़ीखेड़ा बांध से सिंध की पानी की सप्लाई होना है, जिसके लिए बांध पर इंटेकवेल बनाना है। इसके अलावा बांध से सतनवाड़ा फिल्टर प्लांट और अन्य फॉरेस्ट एरिया में पाइप लाइन बिछना है। जल निगम द्वारा वन विभाग को 3 करोड़ रुपए जमा करा चुका है। वहीं वनभूमि के बदले 30 हेक्टेयर जमीन भी उपलब्ध कराई जा चुकी है।
इसके बाद भी वन विभाग से अनुमति में देरी से लाखों की आबादी से संबंधित प्रोजेक्ट प्रभावित होता जा रहा है। बता दें कि स्टेज-1 की अनुमिति 31 मार्च 2023 के आसपास मिल चुकी थी। स्टेज-2 की अनुमति के लिए प्रस्ताव फिर से भेजा गया। लेकिन उम्मीद थी कि अप्रैल में अनुमति मिल जाएगी, लेकिन वन विभाग की तरफ से स्टेज-2 की अनुमति में देरी की जा रही है। इस कारण तय समय सीमा में प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पा रहा है।
वन विभाग को पोहरी में राजस्व जमीन दी है
वन भूमि में इंटेकवेल व पानी की पाइप लाइन बिछाने के लिए दूसरी जगह जमीन दी जाती है। राजस्व विभाग ने पोहरी अनुविभाग में 30 हेक्टेयर जमीन अलॉट कर दी है। खानापूर्ति में वन विभाग के वरिष्ठ अफसरों की देरी की बदौलत समूह पेयजल योजना का काम पिछड़ता जा रहा है। खास बात यह है कि जनप्रतिनिधि इस मामले में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
मई का पहले सप्ताह बीता, इस महीने अनुमति की उम्मीद बंधी
अप्रैल के बाद मई का पहले सप्ताह बीत चुका है, अभी तक स्टेज-2 की अनुमति नहीं मिल सकी है। जल निगम के अधिकारी व एलएनटी कंपनी के लोगों को मई में अनुमति की उम्मीद बंधी है। जबकि वन विभाग की तरफ से कुछ भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।
जिला स्तर से सारी कागजी खानापूर्ति हो चुकी है। कलेक्टर और कमिश्नर स्तर से पत्राचार होने के बाद भी वन विभाग में वरिष्ठ स्तर से परमिशन में देरी पर देरी की जा रही है। सरकारी प्रोजेक्ट में विभागों के बीच समन्वय की कमी साफ दिख रही है।
असर : काम करने के लिए गर्मियों के दो महीने बचे
मई में स्टेज-2 की परमिशन मिलती है तो काम करने के लिए गर्मियों के सिर्फ दो महीने ही बचे हैं। फिर बरसात में काम संभव नहीं हो पाएगा। प्रोजेक्ट जनवरी 2024 में पूरा होना है, लेकिन इंटेकवेल के काम की शुरुआत ही नहीं हुई है, जिसे अप्रैल या मई 2024 तक पूरा हो पाएगा। परमिशन में जितनी देरी, उतना काम पिछड़ेगा।
जितनी जल्दी परमिशन मिलेगी, काम चालू कर देंगे
हमारे अन्य काम लगभग पूरे होने जा रहे हैं। लेकिन इंटेकवेल का काम शुरू नहीं हो सका है। स्टेज-1 की परमिशन मिली तो स्टेज-2 की परमिशन में देरी हो रही है। हम अपने स्तर से पूरे प्रयास में लगे हैं। जितनी जल्दी परमिशन मिलेगी, हम तुरंत काम चालू कर देंगे।
दीपेन पाटोलिया, प्रोजेक्ट मैनेजर, मड़ीखेड़ा समूह जल प्रदाय योजना (एलएनटी)

841 गांवों और बदरवास को मड़ीखेड़ा बांध से पानी मिलने में होगी देरी, इंटेकवेल का काम ही शुरू नहीं / Shivpuri News
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