शिवपुरी। मेडिकल कालेज में बुधवार को चिकित्सकों की लापरवाही से एक प्रसूता ने मेडिकल वार्ड में ही एक बच्ची को जन्म दे दिया। डाक्टरों ने लापरवाही को छिपाने के लिए कालेज प्रबंधन ने इस सामान्य प्रसव को डीएनसी (गर्भाशय की सफाई) बताया था। सिर्फ इतना ही नहीं जिंदा बच्ची को मृत बता दिया गया। जब इस बात की जानकारी मीडिया को लगी कि मेडिकल कालेज प्रबंधन लापरवाही पर पर्देदारी करने के लिए झूठ प्रस्तुत कर रहा है तो मौके पर पहुंचकर प्रसूता से बात की। इसमें पता चला कि उसकी डीएनसी की ही नहीं गई। उसे तो पलंग पर प्रसव हुआ था। उसकी कोख से एक बच्ची ने जन्म लिया जो एसएनसीयू में भर्ती है। प्रसूता को भी प्रसूति वार्ड में शिफ्ट कर दिया, लेकिन इंफेक्शन के डर से कोई चिकित्सक उसे देखने तक नहीं गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम मामौनी चक निवासी रेनू पत्नी मुरारी लाल कुशवाह सात माह गर्भवती थी। इसी दौरान डाक्टरों ने उसे टीबी होना बताया जिसका इलाज जारी था। सप्ताह भर पहले उसे प्रसव संबंधी कोई परेशानी हुई तो उसके परिजन उसे मेडिकल कालेज लेकर आए। मेडिकल कालेज में प्रसूता को उपचार के लिए भर्ती किया गया, लेकिन रेनू को टीबी होने के कारण उसे गायनिक वार्ड में भर्ती करने की बजाय मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया। बुधवार को प्रसव पीड़ा होने पर उसे न तो ओटी में ले गए और न ही लेबल रूम में। जिसके बाद मेडिकल वार्ड में ही असुरक्षित प्रसव हो गया। मेडिकल कालेज में के डाक्टरों की इस लापरवाही पर जब मेडिकल कालेज प्रबंधन से बात की गई तो मेडिकल कालेज प्रबंधन ने मेडिकल वार्ड में हुए इस प्रसव को प्लांड डीएनसी करार दिया। इसके अलावा बच्चे को मृत बताया। जबकि ऐसा नहीं है। प्रसूता ने प्री-मैच्योर बच्ची को जन्म दिया है जो एसएनसीयू में भर्ती है।
पहले वार्ड इंफेक्टेड हो रहा था अब नहीं…
एक दिन पहले मेडिकल कालेज प्रबंधन ने यह कहा था कि प्रसूता को मेडिकल संबंधी परेशानी होने के कारण मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया था। जबकि प्रसूता के अनुसार वह वास्तविकता में प्रसव संबंधी परेशानी से वहां भर्ती हुई थी। शिफ्ट न करने के पीछे इंफेक्शन का खतरा बताया गया था। नईदुनिया द्वारा इस मामले को उठाने के बाद प्रसूता को प्रसूति वार्ड में भर्ती कर दिया गया। विचारणीय पहलू यह है कि क्या अब वार्ड में इंफेक्शन नहीं फैलेगा?






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