शिवपुरी। वन विभाग के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं कभी अवैध पत्थर उत्खनन, रेत उत्खनन या फिर जंगल का विकास करना हो। वन विभाग के अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक सब के सब जमकर भ्रष्टाचार करने में लगे हुए हैं।
ऐसा ही कुछ हुआ नेशनल पार्क से लगे तीन गांवों की अधिग्रहित जमीन पर यहां वन विभाग ने आज से तीन महीने पहले लगभग 2500 पौधे रोपे थे इसके लिए 13 लाख रूपए का बजट भी स्वीकृत हुआ था, लेकिन देखरेख की कमी के कारण सभी पौधे सूख गए। ताज्जुब की बात तो यह है कि जब इस संबंध में रेंजरों से जानकारी चाही तो उन्होंने 80 प्रतिशत पौधे जीवित बता दिए।
मामौनी गांव के नजदीक पार्क द्वारा अधिग्रहित खेती वाली जगह पर मार्च 2022 में 1500 पौधे रोप दिए लेकिन पौधों को सींचा नहीं गया। पार्क रेंजर मोनिका ठाकुर ने रोपे गए पौधों में से 80% जीवित होने का दावा किया है। इसी तरह बीट गार्ड महेंद्र श्रीवास्वत ने बताया कि लखनगवां और हरनगर में भी 900 पौधे फरवरी-मार्च में रोपे थे। यहां भी मौके पर सारे पौधे सूख चुके हैं।
चारागाह बनाने 13 लाख बजट, मार्च क्लोजिंग के चलते खपाया
मामौनी और अर्जुनगवां बीट में अधिग्रहित जमीन में चारागाह बनाया जाना है। यहां 13 लाख से अधिक का बजट जारी हुआ था। मार्च क्लोजिंग के चलते आनन फानन में पौधरोपण की तैयारी करके बजट खपा दिया लेकिन धरातल पर पौधे रोपकर उनकी सिंचाई तक नहीं की। पार्क अफसराें की लापरवाही से बजट के रूप में लाखों का नुकसान हो गया है।
80% पौधे जीवित हैं
हमने मामौनी गांव के पास 1500 पौधे रोपे हैं। गर्मी की वजह से पूरे पौधे सुरक्षित तो नहीं रह पाते लेकिन करीब 80% पौधे जरूर जीवित हैं।
-मोनिका ठाकुर, रेंजर, नेशनल पार्क शिवपुरी






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