शिवपुरी। शहर में पखवाड़े भर पहले एक शिक्षक की शिकायत के बाद पुलिस की गिरफ्त में आया डंडा बैंक का संचालक बर्खाश्त होमगार्ड सैनिक रवि यादव का कारोबार अब परत दर परत खुलता चला जा रहा है। जिले के विभिन्न थानों में रवि यादव के खिलाफ दो दर्जन से अधिक लोगों ने उनके सथ की गई अवैध वसूली और धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई हैं। पुलिस ने लेकिन आरोपित के खिलाफ सिर्फ एक ही एफआईआर दर्ज की है। डंडा बैंक संचालक अपने इस अवैध कारोबार को एक सिंडिकेट के रूप में कर रहा था। इस कारोबार के तार शहर से गांव तक और दीगर जिलों तक भी फैले हुए हैं। यह सिंडिकेट पहले तो कर्ज देते समय संबंधित व्यक्ति से उसका और उसके गारंटर का ब्लैंक चैक तो लेता ही है साथ ही कर्जदार का एटीएम भी ले लेता है ताकि हर महीने उसके खाते में से ब्याज और किस्त की रकम निकाल सके। जब पूरा कर्ज चुकता हो जाता है तो जो कर्जदार अथवा गारंटर के जो ब्लैंक चैक लिए होते हैं उन्हें संबंधित को वापिस करने की बजाय उस चैक को सिंडिकेट में शामिल दूसरे डंडा बैंकर्स से पेमेंट के लिए लगवा कर बाउंस करवा लेता है और फिर उस पर कोर्ट केस कर उसके साथ धोखाधड़ी व कथित लूट को अंजाम दिया जाता है। पुलिस थानों में कई केस डंडा बैंक के दर्ज हैं, लेकिन कार्रवाई चुनिंदा पर ही की गई है। कई सूदखोरों पर जांच के जरिए आंच नहीं लगने दी जा रही है।
पुलिस की भूमिका संदिग्ध क्योंकि.. दो दर्जन से ज्यादा आवेदन, केस सिर्फ एक
डंडा बैंक संचालक रवि यादव पर मामला दर्ज होने के बाद खुद पुलिस ने मुनादी कराई कि जो भी रवि यादव या किसी अन्य सूदखोर से पीड़ित हों वे थाने पर आकर शिकायत दर्ज कराएं। इसके बाद दो दर्जन से अधिक पीड़ित तो सामने आ गए, लेकिन यह आवेदन थाने में कागजों का ढ़ेर बनकर रह गए। सबसे ज्यादा आवेदन कोतवाली में आए, लेकिन टीआइ ने नई एफआइआर करने या पुराने केस में इनके नाम बढ़ाने के बजाए उन्हें दबाकर रखा है। पुलिस इन आवेदनों पर कार्रवाई करने के बजाए सेटलमेंट कराने में जुट गई है। खुद पुलिस भी इस बात को स्वीकार कर रही है कि अब डंडा बैंक संचालक पीडितों के रुपये लौटाने तैयार है। इसका अलावा देकर पुलिस कार्रवाई करने के बजाए बीच में लाइजनिंग कर रही है।






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