रन्नौद। सरकार ग्रामीण अंचल तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के कितने भी दावे कर ले, लेकिन जमीनी स्तर पर यह खोखले ही नजर आते हैं। हाल ही में एक आदिवासी प्रसूता और गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत सिर्फ इसलिए हो गई क्योंकि एंबुलेंस नहीं पहुंची थी। अब ऐसा ही मामला रन्नाौद में आया है जहां चिकित्सक न होने की वजह से स्वास्थ्य केंद्र पर एक मरीज ने दम तोड़ दिया। यदि उसे समय पर इलाज मिल जाता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। लेकिन इलाज करने के वहां कोई मौजूद नहीं था। इस दिनों रन्नाौद स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। महीनों से यहां पर इलाज के लिए डाक्टर ही नहीं हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रन्नाौद के लल्लू कुशवाह उम्र 55 वर्ष रात्रि के समय शौच करने गए और अचानक पैर फिसलने से सीने में धमक लग गई। इसके बाद स्वजन लल्लू को शुक्रवार रात करीब 10 बजे रन्नाौद स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। यहां पर कोई डाक्टर नहीं था। इसके बाद स्वजनों ने कंचन नर्स को बुलाया। ेकिन लल्लू की जान नहीं बचाई जा सकी। लल्लू की मौत होने के बाद स्वजनों ने आरोप लगाए हैं कि इलाज न मिलने के कारण उसकी मौत हुई है। मामले की सूचना पुलिस को लगी तो उन्होंने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
एक डाक्टर वह भी गायब
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रन्नाौद में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग कितना सजग है उसका अंदाजा इस बात से लगाया ज सकता है कि यहां पर एक ही डाक्टर है। एक डाक्टर 24 घंटे तो सेवाएं दे नहीं सकता है। कई बार तो ड्यूटी के समय पर भी यह एकमात्र डाक्टर गायब रहते हैं। पूरा स्वास्थ्य केंद्र नर्स और कंपाउंडरों के भरोसे पर चल रहा है। एक बड़ी आबादी इलाज से महरूम बनी हुई है।
इनका कहना है…
कुछ डाक्टर यहां पर पदस्थ थे, लेकिन उनका पीजी में सिलेक्शन हो गया जिससे कमी आ रही है। अभी कुछ डाक्टर छुट्टी पर भी गए हैं। मामले की जानकारी मुझे मिली है। हम जल्द ही डाक्टर की व्यवस्था कर रहे हैं।
– डा. पवन जैन, सीएमएचओ






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