शिवपुरी। गत वर्ष जिले में हुई अतिवर्षा ने भारी तबाही मचाई थी। पहली बार क्षेत्र में लोगों ने सिंध का ऐसा रौद्र रूप देखा था, जब मड़ीखेड़ा से सिंध का पानी छोड़ा गया तो इसने शिवपुरी के साथ डबरा, दतिया में भी तबाही मचा दी थी। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष भी अच्छी बारिश का अनुमान है। सिंध परियोजना के अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2022-23 में अटल सागर (मड़ीखेड़ा) बांध का जलस्तर 346.25 मीटर तक भरा जाना निर्धारित किया गया है। उक्त बांध का जलस्तर वर्षाकाल में (वेक वाटर से) 346.85 पहुंचने की संभावना है। इसके चलते सिंध में प्रवेश और इसके आसपास के क्षेत्र में किसी भी तरह की गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। मड़ीखेड़ा बांध के डूब से 13 गांव प्रभावित हैं। सिंध परियोजना, पक्का बांध मड़ीखेड़ा के कार्यपालन यंत्री मनोहर बोराटे ने चेतावनी दी है कि वर्षाकाल के दौरान सिंध में न तो प्रवेश करें और न ही यह 13 गांव कोई गतिविधि करें। डूब क्षेत्र की सीमा में प्रवेश न करने की चेतावनी भी जारी की गई है। उन्होंने बताया कि आगामी वर्षाकाल में अटल सागर (मड़ीखेड़ा) बांध के जल द्वारा एवं पावर हाउस से सिंध नदी में किसी भी समय जल प्रवाहित किया जा सकता है।
इन 13 गांव के लिए जारी हुई चेतावनी
बांध के डूब से प्रभावित अधिग्रहित 13 ग्रामों में रायपुर, सौसा, विनेगा, देहरी, खजूरी, बमनौआ, उड़वाहा, कांठी, मितलौनी, दांगीपुरा, रसोई, अमोला एवं करमई शामिल है। यहां गांव बांध के नीचे सिंध की सीमा से लगे हुए हैं। सिंध में जलस्तर बढ़ने पर इन गांवों में खतरा मंडराने लगता है। पिछले वर्ष अगस्त में जब बाढ़ आई थी तो यह गांव डूब गए थे। यहां सेना को रेस्क्यू करना पड़ा था।
पुरानी भूल से लेना होगी सीख, जलस्तर का करना होगा प्रबंध
गत वर्ष जब बाढ़ आई थी तो इसमें सामने आया था कि मड़ीखेड़ा बांध से देरी से पानी छोड़ा गया था। सही समय पर यदि पानी छोड़ा जाता तो ग्वालियर को बाढ़ से बचाया जा सकता था। दरअसल सिंध पर बने मड़ीखेड़ा बांध का कैचमेंट एरिया काफी बड़ा है। यदि शिवपुरी के अलावा गुना, विदिशा क्षेत्र में भी अतिवर्षा होती है तो इसका प्रभाव मड़ीखेड़ा के जलस्तर पर पड़ता है।






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