शिवपुरी। लड़की का पिता नहीं है, मां काम पर चली जाती है। घर पर कौन उसकी रखवाली करे। इसलिए बिटिया का विवाह कर रहे। नाबालिग है तो क्या हुआ हम जिम्मेदारियों से तो मुक्त हो जाएंगे। जब यह बात विवाह रोकने गई टीम से परिजनों ने कही तो टीम ने 18 से कम उम्र पर विवाह करने को मनाही की और मामला दर्ज करने के साथ सजा भुगतने की बात कही तो इसके बाद नाबालिग के परिजन शादी ना करने को लेकर राजी हो गए। इस तरह दो अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशासन की टीम ने दो नाबालिग विवाह होने से रोके।
बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि करैरा परियोजना अधिकारी प्रियंका बुनकर को अमोला के मितलोनी में 14 वर्षीय लाड़ो के बाल विवाह की सूचना मिलने पर वह सेक्टर सुपरवाइजर गीता जाटव के साथ मौके पर पहुंचीं। जहां परिजनों से उम्र के प्रमाण प्राप्त किए तो लड़की की उम्र 15 वर्ष से कम होने से परिजनों को विवाह न समझाया।परिजनों ने टीम के सामने तर्क रखा कि लड़की का पिता नहीं है,मां काम पर चली जाती है।
घर पर कौन उसकी रखवाली करे। इसलिए उसका विवाह करना चाहते है।टीम ने समझाया कि अगर पिता नहीं है तो बेटी का पालन पोषण करना, उसे पढा- लिखाकर जागरूक बनाना और सही उम्र में विवाह करना मां के साथ परिवार, समाज और रिश्तेदारों की जिम्मेदारी होती है।
सभी रिश्तेदार और परिवार के लोग कम उम्र में विवाह कर रहे है।पहले उसे विवाह के काबिल तो बनाओ।टीम के 2 घण्टे तक समझाने के बाद परिवार उम्र पूरी होने के बाद विवाह करने को राजी हुआ। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और पंचायत सचिव को बालिका के परिवार की निगरानी करने के कहा गया।
18 साल में कर रहे थे युवक, समझाया तो माने
खनियाधाना थाना क्षेत्र के गांव पुरा में 18 वर्षीय लड़के का बाल विवाह रोकने पहुंचे टीम सदस्यों से उसके दादा ने कहा।आप कहते है तो ठीक है हम तीन साल बाद विवाह कर लेंगे। पर साहब खाना बन गया है, मेहमानों को खाना तो खिला दें। खाना खिलाकर उन्हें रवाना कर देंगे। यह बात चाइल्ड लाइन नंबर पर पुरा गांव में नाबालिग लड़के के बाल विवाह की सूचना प्राप्त होने पर महिला एवं बाल विकास की टीम मौके पर पहुंची।
और उम्र के प्रमाण देखने के बाद परिजनों को विवाह न करने के लिए समझाया। जब कानून में सजा की बात बताई तो परिजन उम्र पूरी होने के बाद विवाह करने को सहमत हुए। टीम में सेक्टर सुपरवाइजर शांति इक्का सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।






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