शिवपुरी। शिवपुरी शहर में भूमिगत जल स्त्रोत खत्म न हो इसके लिए शहर में डेढ दर्जन से अधिक तालाबों का निर्माण कराया गया था और सभी तालाबों को पक्के नालों के माध्यम से एक—दूसरे से कनेक्ट भी किया गया था जिसके चलते कोई भी तालाब ओवरफ्लो नहीं होता था लेकिन बीते डेढ़ दशक में भूमाफियाओं व प्रशासन की हीलाहवाली के कारण कई तालाब अपना अस्तित्व खो चुके हैं और जो तालाब बचे हुए हैं उन पर भी भू—माफियाओं की नजर है।
शहर का मनियर तालाब की जमीन पर कुछ लोगों द्धारा कब्जा कर लिया है और यहां पर खेती की जा रही है वहीं एक वाटर प्लांट भी संचालित है। इतना ही नहीं भू—माफियाओं ने जमीन पर कब्जा कर प्लॉट काटे जा रहे हैं और कुछ ने तो निर्माण कार्य शुरू भी कर लिया है। गौर करने वाली बात यह है कि एक तरफ प्रशासन जलाभिषेक अभियान चलाकर तालाबों के जीर्णोद्धार के फोटो सेशन करवा रहा है वहीं दूसरी ओर भू माफिया जिला मुख्यालय के तालाबों को निगम रहे हैं।
भू माफियाओं ने तालाबों को खत्म कर दिया है और वहां पर कॉलोनिया बनाने के साथ आलीशान कोठियां बना दीं। अब जो शेष पांच तालाब रह गए हैं उनमें से तीन तालाबों को छोड़कर दो तालाबों मनियर व भुजरिया तालाब पर भू माफिया कब्जा करने की होड़ में लगे हुए हैं। इनमें से मनियर तालाब में तो पानी रोकने की कोई जगह ही नहीं छोड़ी गई। बरसात में तालाब में पानी आने के बाद उसे निकाल दिया जाता है और फिर खाली हुई जमीन पर खेती की जाती है।






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