शिवपुरी। करैरा जनपद की ग्राम पंचायत सजरा बाघौर की महिला सरपंच मंगलवार को ग्रामीणों के साथ कलेक्ट्रेट में सचिव की दबंगई और अधिकारियों की असुनवाई की गुहार लेकर पहुंची। महिला सरपंच का कहना था कि मुझे गांव वालों ने जिस मंशा से सरपंच बनाया मैं उस पर खरी उतरना चाहती हूं। लेकिन इस समय मैं अकेली हूं, मेरा कोई राजनैतिक आका नहीं है। यही कारण है कि पंचायत का दबंग सचिव मुझे परेशान कर रहा है। अधिकारियों को शिकायत कर चुकी हूं लेकिन कहीं पर मेरी कोई सुनवाई नहीं की जा रही। वर्ष 2020 से सचिव की दबंगई को लेकर जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ एचपी वर्मा व वर्तमना सीईओ उमराव सिंह मरावी को भी कई आवेदन दे चुकी, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। मेरे पति पिछले तीन साल से जेल में बंद हैं और मैं अकेली रह गई हूं इसलिए मेरी मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। महिला सरपंच का आरोप है कि सचिव हरिशंकर परिहार की दबंगई और हठधर्मिता के कारण गांव के मजदूरों को मजदूरी के लिए अन्य स्थानों पर पलायन करना पड़ रहा है क्योंकि पंचायत क्षेत्र में कोई काम हो नहीं रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव हरिशंकर परिहार कुटीर देने के एवज में 20 हजार रुपये की मांग कर रहा है। फूल सिंह जाटव का कहना है कि उसकी कुटीर दो महीने पहले स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन सचिव उससे कुटीर की राशि देने के एवज में 20 हजार रूपए मांग रहा है। ग्रामीण के अनुसार अगर वह सचिव को राशि नहीं देगा तो उसकी कुटीर की राशि उसे नहीं मिलेगी। गांव वालों के अनुसार पंचायत में हर काम का दाम फिक्स है। महिला गुड्डी के अनुसार मेरे दो बेटों अरूण और पप्पन के नाम खाद्यान कूपन में बढ़ाने के एवज में 800-800 रुपये लिए हैं। अगर पैसे नहीं देते तो नाम नहीं बढ़ते हैं। महिला शांति के अनुसार उसके बेटे राजेश का नाम खाद्यान सूची में चढ़वाने के एवज में एक हजार रुपये मांग रहा है।
मुझे दो साल से नहीं दिया वेतन
पंचायत के भृत्य जसरथ परिहार का कहना है कि मैंने पंचायत सचिव हरिशंकर परिहार को दो साल से कोई वेतन नहीं दी। जसरथ के अनुसार मैंने जब उससे वेतन मांगा तो वह मुझे फावड़े से मारने दौड़ा। जसरथ का कहना है कि मैं जनपद पंचायत सीईओ से लेकर तहसीलदार, जिला पंचायत सीईओ, कलेक्टर को आवेदन दे चुका है लेकिन उसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई है।






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