शिवपुरी। बज्मे उर्दू की मासिक काव्य गोष्ठी गांधी सेवाश्रम पर आयोजित की गई। इस काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता शकील नश्तर ने की। मुख्य अतिथि लखन लाल खरे थे। गोष्ठी का आगाज राधेश्याम परदेसी की भाव प्रधान रचना से हुआ। उन्होंने कहा आतिश ए इश्क दिल में जब लगती है बंदिशों की दीवारें ढह जाती हैं, सब कुछ मिल जाता है हाथ में फकत यादें रह जाती हैं। डॉ. संजय शाक्य ने कहा आकर के अंजुमन की तू रौनक बढ़ा दे अब, थकने लगे चराग तेरे इंतजार में.., इरशाद जालौनवी ने अभी तो बहुत दूर मंजिल है अपनी, कदम लड़खड़ा ने लगे क्यों अभी से.. सुनाई। वहीं भगवान सिंह यादव ने अपनी रचना भगवान करे इच्छा सब लोग निरोगी हैं, कुशाल बने जीवन हलकान न होना है सुनाई। गोष्ठी को आगे बढ़ाते हुए राजकुमार चौहान ने इसमें होली के रंग भी घोले। चौहान ने कुंडलियां और दोहे पढ़े गोरी दोनों हाथ में ले लो रंग गुलाल मौका है, यह फाग का रंग दो सब के गाल..।
सत्तार शिवपुरी ने भी होली पर लिखी अपनी रचना प्रियतम फिर ले आईयो बा होरी सौ रंग पढ़ी। उन्होंने ये भी कहा – लो फिर आ गया बसंत संग लेकर अपने हरियाली, नाच उठा पत्ता पत्ता झूम उठी डाली डाली। वरिष्ठ कवि दिनेश वशिष्ठ ने अच्छा बनने को बुरी बात बताते हुए कहा तकलीफों की शुरुआत है मत बनना, अच्छा बनना बुरी बात है मत बनना। वहीं डॉक्टर लखनलाल खरे ने चुनाव का जिक्र करते हुए कहा जो जीते जलसे जुलूस के जश्न में वे डूब गए, जो हारे हैं वे कारण अभी तलाश रहे, दोनों दल हैं अति व्यस्त बताओ जनता किसके पास रहे। हास्य व्यंग के कवि अशोक जैन ने भी राजनीतिक परिदृश्य को रोमांटिक ढंग से प्रस्तुत किया जो बहुत सराहा गया। इसके साथ ही रामकृष्ण मौर्य, शकील नश्तर आदि ने भी रचना सुनाई। आभार सत्तार शिवपुरी ने माना।






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