जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में लगातार 12 दिन की देखभाल के बाद एक जच्चा द्वारा शिवपुरी जिला अस्पताल में जन्में तीन बच्चों की जान बचा ली गई है। अब तीनों बच्चे ग्रोथ भी कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब किसी जच्चा द्वारा एक साथ तीन बच्चों को जन्म दिया जाता है तो वह इतने कमजोर होते हैं कि सभी की जान बचा पाना बेहद मुश्किल होता है। जिला अस्पताल में पहली बार सभी बच्चों को सुरक्षित बचाया गया है। तीनों बच्चों को जन्म के साथ ही सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और वह ग्रोथ भी नहीं कर रहे थे। ऐसे में बच्चों को ऑक्सीजन पर रख कर लगातार प्रयास किए गए जो सफल हुए हैं।
28 फरवरी को अस्पताल में हुई थी डिलेवरी
सिरसौद के ग्राम टोंगरा निवासी अंजली पत्नी गंटू जाटव की 28 फरवरी को जिला अस्पताल में पहली डिलेवरी हुई थी। अंजली ने कुछ-कुछ समय के अंतराल पर तीन बच्चों को जन्म दिया। इन बच्चों में पहला बेटा, दूसरी बेटी और तीसरे नंबर पर बेटे ने जन्म लिया। तीनों बच्चे जन्म के साथ ही सांस नहीं ले पा रहे थे और तीनों का वजन क्रमश। 1 किलो 200 ग्राम, 1 किलो 400 ग्राम व 1 किलो 400 ग्राम था। तीनों बच्चों को जन्म के तत्काल बाद ऑक्सीजन पर लेना पड़ा। दोनों बेटों की स्थिती में तो 48 घंटे बाद सुधार हो गया लेकिन बेटी की स्थिती नहीं सुधरी, जिस पर उसे कई दिन तक ऑक्सीजन पर रखना पड़ा। एसएनसीयू प्रभारी डॉ बृजेश मंगल, डॉ सुनील गौतम, डॉ विनोद गोलिया, नितिन दुबे व नर्सिंग स्टाफ ने 12 दिन तक तीनों बच्चों को गहन ऑव्जर्वेशन में रखा और अंततः उनके अथक प्रयास काम आए। तीनों बच्चों को बचा लिया गया और वह अब ग्रोथ भी कर रहे हैं। आज तीनों बच्चों का वजन क्रमशः 1 किलो 250 ग्राम, 1 किलो 500 ग्राम व 1 किलो 500 ग्राम है।
इनका कहना है
-तीनों बच्चों को 28 फरवरी को एसएनसीयू में बेहद नाजुक हालत में लाया गया था। तीनों की स्थिती नाजुक थी। उन्हें ऑक्सीजन पर रख कर काफी बारीकी से देखभाल करना पड़ी। तीना बच्चे अब स्वस्थ हैं और पूर्णतः सुरक्षित हैं। जिला अस्पताल में जन्में तीन बच्चों के मामले में पहली बार तीनों बच्चे पूर्णतः स्वस्थ हैं।
डॉ बृजेश मंगल
एसएनसीयू प्रभारी






Be First to Comment