शिवपुरी। मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में शनिवार को वहीं के सुपरवाइजर को हार्ट अटैक आ गया। जीएमसी में सुपरवाइजर अभिषेक शर्मा को सुबह करीब 10.30 हार्ट अटैक आया। तब वह ड्यूटी पर था। आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में ही उसका इलाज शुरू किया गया, लेकिन जल्द ही चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए, क्योंकि मेडिकल कॉलेज में अब तक कोई कॉर्डियालॉजिस्ट ही नहीं है। ऐसे में जिस मेडिकल कॉलेज में जिलेभर के मरीज रेफर होने थे, उन्हें खुद अपने कर्मचारी को दूसरे मेडिकल कॉलेज में रेफर करना पड़ा। हालांकि ग्वालियर में भी उसकी जान नहीं बचाई जा सकी और शनिवार देर रात अभिषेक ने दम तोड़ दिया। इस एक मौत ने एक बार फिर मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर दिया।
हार्ट का मरीज कैसे तय करे 120 किमी का सफर
हार्ट अटैक आने के बाद मरीज की जिंदगी के लिए एक-एक सेकंड बहुत कीमती होता है। जब जिले में इलाज नहीं मिल पाता तो उसे ग्वालियर रेफर करना पड़ता है जो 120 किमी दूर है। इस दूरी को तय करने में दो घंटे का समय लगता है और तब तक मरीज की सांसे संकट में ही रहती हैं। इस कारण से कई मरीज दम भी तोड़ देते हैं।
मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों की कमी
मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट जैसी सुपरस्पेशियलिटी के चिकित्सक नहीं हैं। इतना ही नहीं यहां पर एंजियोप्लास्टी की व्यवस्था भी नहीं है। एंजियोप्लास्टी के लिए काफी मशीनरी और तकनीक लगती है। मेडिकल कॉलेज की ओर से चिकित्सकों की डिमांड भेजी हुई है, लेकिन अभी तक यह पूरी नहीं हुई है। जिले में 20 लाख से अधिक आबादी के इलाज के लिए एक कॉर्डियोलॉजिस्ट भी नहीं है।
सिर्फ जिला अस्पताल में ही आते हैं 100 से ज्यादा मरीज
यदि जिले में ह्रदय रोग की बात करें तो महीने भर में 100 से ज्यादा मरीज दिल में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। इसमें से 50 फीसद मरीजो ंको रेफर कर दिया जाता है। यह मरीज मेडिकल कॉलेज नहीं, बल्कि ग्वालियर रैफर किए जाते हैं। यहां भी कारण यही है कि जिला अस्पताल में भी कोई हार्ट स्पेशियलिस्ट नहीं है। अच्छे चिकित्सकों की कमी जिले की आबादी की दिल की सेहत के लिए खतरा साबित हो रही है।
इनका कहना है
मरीज को दो हार्टअटैक एक साथ आए थे। ऐसी स्थिति में एंजियोप्लास्टी की जरूरत थी और इसी कारण उसे ग्वालियर रेफर किया गया। वहां उसे तीसरा अटैक आ गया था। हमारे यहां पर सुपर स्पेशियलिटी की सुविधाएं नहीं हैं। इसके लिए शासन को डिमांड भेजी गई है।
केबी वर्मा, अधीक्षक, जीएमसी।






Be First to Comment