शिवपुरी। खेल गतिविधियों के लिए चिन्हित सरकारी बिल्डिंग शिवपुरी क्लब का व्यवसायिक उपयोग कर कुछ चिनिंदा लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। यहां खेलने आने वाले बच्चे अकादमी के है जो हर महीने फीस देकर इस क्लब में खेलने आते हैं। वहीं सबसे बड़ी बात यह है कि किसी को यह नहीं पता कि बिल्डिंग किस विभाग के अधीन है।
इस बिल्डिंग में खेल गतिविधियों के नाम पर अकादमियों का संचालन किया जा रहा है इसके अलावा खेल परिसर में होर्डिंग-बैनर गाढ़ने की अनुमति देकर इसका व्यवसायिक उपयोग भी किया जा रहा है। नियमानुसार यह पूरी तरह गलत है, क्योंकि क्लब का जो सामान्य नियम है उसकिे अनुसार जो भी खिलाड़ी यहां खेलने आएगा वह अपनी सदस्यता दर्ज करवाएगा और खेलेगा। इसके एवज में उससे निर्धारित सदस्यता शुल्क नियमानुसार लिया जाएगा। कहीं न कहीं इमारत में चल रहीं गतिविधियां पूरी तरह से स्पष्ट एवं साफ-सुथरी नहीं हैं। इस संबंध में जब क्लब के सचिव केबी लाल सक्सेना से बात की गई तो उन्होंने भी स्वीकार किया कि परिसर के अंदर होर्डिंग बैनर लगाने की अनुमति सांड पब्लिसिटी को उन्होंने ही दी है और इससे जो पैसा आता है, उसका उपयोग वह क्लब के रख-रखाव के लिए करते हैं। बकौल केबी लाल सक्सेना आज तक इस इमारत के रखरखाव के लिए एक रूपए का भी बजट नहीं आया है, जबकि कुछ साल पुराना सरकारी रिकॉर्ड खंगाला जाए तो इस इमारत का रखरखाव शासकीय फंड से किया जाता रहा है। खास बात यह है कि यह इमारत किसकी इसकी जानकारी न तो नगर पालिका के जिम्मेदारों को है और न ही पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अधिकारियों को। कुल मिलाकर यह इमारत किसकी है किसी को इसकी जानकारी नहीं है।
सरकारी इमारत में नहीं हो सकते प्रायवेट विज्ञापन
बात अगर नियमों की करें तो भले ही जिम्मेदार अधिकारी अनुमति प्रदान कर दें लेकिन नियमानुसार सरकारी इमारत में निजी संस्थानों के विज्ञापन नहीं किए जा सकते हैं। शिवपुरी नगर पालिका के रिटायर्ड स्वास्थ्य अधिकारी अशोक शर्मा के अनुसार भले ही नपा से पब्लिसिटी का ठेका हुआ हो, लेकिन इसके बाबजूद शिवपुरी क्लब के अंदर निजी विज्ञापन नहीं किए जा सकते हैं।
इनका कहना है
-यह क्लब सरकारी इमारत नहीं है, क्लब में होर्डिंग-बैनर लगाने की इजाजत हमने दी है और इससे जो पैसा आता है उससे हम क्लब का रखरखाव करते हैं। क्लब के रख-रखाव पर कोई सरकारी बजट खर्च नहीं किया जाता।
केबी लाल सक्सेना
सचिव, शिवपुरी क्लब
-यह मेरी जानकारी नहीं है कि उक्त इमारत किसकी है, मुझे इसके लिए एसडीओ से पूछना पड़ेगा क्योंकि इतनी सारी इमारतों में याद नहीं रहता है कि कौन सी इमारत किसके पजेशन में है।
धर्मेन्द्र यादव
ईई, पीडब्ल्यूडी






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