शिवपुरी। प्रकाशसिंह रावत जिलाध्यक्ष ओबीसी महासभा के नेतृत्व में एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा गया। ज्ञापन में आरक्षण सहित विभिन्न मांगे रखी गई और उनका जल्द निराकरण करने की बात कही।
ये हैं प्रमुख मांगे
- मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शासन द्धारा 27 प्रतिशत आरक्षण देने के आदेश के बावजूद ओबीसी वर्ग के आवेदकों को न्यायालय द्धारा केवल 14 प्रतिशत ही देने का निर्णय पारित किया गया है जो कि ओबीसी वर्ग के साथ शासन प्रशासन का दोहरा रवैया प्रतीत होता है। अत: ओबीसी वर्ग के आवेदकों को एमपीपीएससी में तत्काल प्रभाव से 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ नियुक्ति दी जाए।
- ओबीसी वर्ग को अनु. 340 के परिपालन में जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाए।
- ओबीसी वर्ग के लिए सड़क से लेकर सदन तक सार्वजनिक क्षेत्र से लेकर निजी क्षेत्र में 51 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए।
- मध्यप्रदेश के पंचायत चुनावों में शासन द्धारा ओबीसी वर्ग के केवल 18 वर्ष से अधिक मतदाताओं का आंकड़ा एकत्रित किया जा रहा है। उस पंचायत के शेष ओबीसी वर्ग के मूल निवासियों का नहीं जो भी मध्यप्रदेश सरकार की ओबीसी वर्ग को गुमराह करने की साजिश प्रतीत हो रही है। अत: पारदिर्शता के साथ सभी पंचायतों में ओबीसी का डाटा एकत्रित कर सार्वजनिक किया जाए।
ओबीसी वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में जोड़ा जाए।
— 17 पफरवरी 2022 को मप्र शासन विधि और विधायी कार्य विभाग द्वारा उच्च न्यायालय प्रदेश खंडपीठ ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर में शासकीय अधिवक्ताओं की जो सूची जारी की गई है, ओबीसी वर्ग के अधिवक्ताओं को समुचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। अत: उक्त जारी आदेश को संशोधित कर 51 प्रतिशत प्रतिनिधित्व के साथ सूची जारी की जाए।






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