शिवपुरी। आगरा में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई में 10 तेंदुओं की खाल और सिर के साथ चार अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करों की गिरफ्तारी के छह दिन बाद अब शिवपुरी में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आरोपियों ने पूछताछ में तेंदुओं की खाल शिवपुरी से खरीदने का दावा किया है, जिसके बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
आगरा के सैंया थाना क्षेत्र में वन विभाग, पुलिस और वाइल्डलाइफ एसओएस की संयुक्त टीम ने डिकॉय ऑपरेशन चलाकर चार तस्करों को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से 10 तेंदुओं की खाल, 10 सिर और एक कार बरामद हुई थी। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि वे शिवपुरी से तेंदुओं की खाल करीब 40 हजार में खरीदकर दिल्ली, हरियाणा और दक्षिण भारत के राज्यों में ऊंचे दामों पर बेचते थे।
गिरफ्तार आरोपियों में भोगीराम आदिवासी निवासी शिवपुरी, गब्बर निवासी मुरैना, सतपाल नाथ निवासी फरीदाबाद और भगत सिंह निवासी हरियाणा शामिल हैं। आरोपियों के अनुसार वे दिन में गांव-गांव घूमकर चटाई और घरेलू सामान बेचते थे तथा इसी आड़ में वन्यजीव अंगों की तस्करी करते थे।
मामले में वन विभाग बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच कर रहा है। बरामद खाल, सिर और वाहन को सील कर जांच शुरू कर दी गई है तथा मामले की जानकारी वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), मध्य प्रदेश वन विभाग और एसटीएफ को भेजी गई है।
CCF बोले- शिवपुरी में शिकार की कोई जानकारी नहीं
आगरा में आरोपियों के खुलासे के बाद जब शिवपुरी के जंगलों पर सवाल उठे तो माधव टाइगर रिजर्व के सीसीएफ उत्तम शर्मा ने कहा कि माधव टाइगर रिजर्व या शिवपुरी के जंगलों में तेंदुओं के शिकार की कोई सूचना विभाग को नहीं मिली है।







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