
अजेय राज सक्सेना, प्रधान संपादक। शिवपुरी – दोस्तो आप लोगो को पता ही होगा कि जब जब पोहरी चुनाव की बात आती है तो प्रत्याशी निकालने के लिए दो समाज आमने सामने आ जाते है वो है किरार समाज और ब्राह्मण समाज क्योंकि दोनों ही समाज का पोहरी विधानसभा क्षेत्र में बड़ा वोट बैंक हैं। इस सीट पर जातिगत राजनीति को बहुत बढ़ावा दिया गया है। इसका सबसे बड़ा कारण शिवपुरी के किताब वाले नेता जी है। मगर आज की बात करे तो इनको अपनी ये सीट जाती दिख रही है। हाँ तो दोस्तो ये तो चुनावी गणित था, लेकिन घोड़ो का गणित तो अभी बाकी है कि कौन कौन से घोड़े दौड़ेंगे और कौन कौन से दौडऩे की तैयारी कर रहे हैं।
कमल वाले नेताओं की फेरिस्त देखिये जरा गौर से …
सबसे पहले तो बात करते हैं प्रमुख चेहरा किताब वाले नेता जी की। इनका अपना ही बोलबाला है और लंबे समय से सिक्का जमा हुआ है। चुनाव के रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड भी तोड़कर इन्होंने, लेकिन आज की परिस्थितियां बदल चुकी है और इनका कैरियर चौपट होता दिख रहा है क्योंकि इनका विरोध तो इनके समाज में ही बढ़चढ़ कर बोल रहा है। फिर और समाजों की क्या बात करें ये तो वैसे ही विरोध में है और अब बात करें सामाजिक दृष्टिकोण की तो वो भी बहुत खराब है, सर्वे में भी स्थितियां शून्य हैं।
लेकिन किताब वाले नेता जी हैं भाई ऐसे ही कोई थोड़ी है आखिर ये किताब वाले नेता जी है इन्होंने किताबे पढ़ी भी बहुत है और पढ़वाई भी बहुत है तो कुछ तो चाल चली ही होगी। पहले तो हम भी बहुत कंफ्यूज हो गए थे, लेकिन किताब वाले नेता जी का शिवपुरी की तरफ प्रेम (शिवपुरी के लगभग सभी कार्यक्रम अटेंड करना और दौरे करना) और लगाव समझ से परे और इनका महल के प्रति वफ़ादारी, सीएम की करीबी और शिवपुरी का खाली सीट होना और फिर किताब वाले नेता जी चैन से शिवपुरी में सिक्का जमाएंगे और फिर शासन की ओर पहुंच जायेंगे।
लेकिन इन सब में गौर करने वाली बात तो ये है जिन्होंने इनको चलना सिखाया आज इनकी निगाह उनकी ही सीट पर आगयी है भाई, लेकिन मेरा मानना तो ये है कि गुरु आखिर गुरु ही रहेगा, मगर इस समय चेला शक्कर बनता दिख रहा है।
इसी लिए तो नेता कहते है भाई अपना काम बनता भाड़ में जाये जनता।
बाकी और भी बहुत से लोग कतार में है और इस सीट का चुनाव बहुत दिलचस्प होगा।
सभी दोस्तों को राम राम ……
जल्द ही आएगा पार्ट-2







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