
बैंक गारंटी लेने अध्यक्ष और सीएमओ अहमदाबाद में जमे
शिवपुरी। तीन दिन पहले नगर पालिका परिषद के विशेष व्यापक सम्मेलन में सिंध जलावर्धन योजना की भागीदार फर्म दोशियान को मुख्य नगर पालिका अधिकारी गोविन्द भार्गव ने सेवा समाप्ति का कारण बताओ नोटिस थमाया है। सीएमओ गोविन्द भार्गव ने बताया कि नोटिस में दोशियान से पूछा गया है कि क्यों न उनको टर्मिनेट कर दिया जाए, क्योंकि वह निर्धारित समय में कार्य को पूर्ण करने में असफल रहे हैं। दोशियान को जवाब देने के लिए पंद्रह दिन का समय दिया गया है। श्री भार्गव ने बताया कि दोशियान का जवाब संतोषप्रद न होने पर उन्हें टर्मिनेट कर दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग के ईएनसी से अनुमति ली जाएगी। नोटिस मिलने के बाद दोशियान के महाप्रबंधक महेश मिश्रा ग्वालियर उच्च न्यायालय की शरण लेकर राहत का प्रयास करने में जुटे हुए हैं। हालांकि श्री मिश्रा ने बताया कि उन्हें अभी कारण बताओ नोटिस नहीं मिला है और वह बदस्तूर सिंध जल की सप्लाई करने में लगे हुए हैं। उन्होंने सीएमओ पर यह आरोप भी मढ़ा कि तीन दिन से उन्होंने एक दर्जन से अधिक बार मोबाइल लगाए, लेकिन मोबाइल रिसीव नहीं किया गया। सीएमओ से संपर्क न होने के कारण वह बिना फिल्टर किया हुआ पानी सप्लाई करने पर विवश हैं, क्योंकि नगर पालिका द्वारा उन्हें क्लोरीन, फिटकरी और कैमिकल नहीं दिया जा रहा है।
दोशियान और नगर पालिका के बीच छिड़ी जंग के कारण नगर पालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह और सीएमओ गोविन्द भार्गव पिछले दो दिन से अहमदाबाद में ही जमे हुए हैं। सीएमओ भार्गव ने बताया कि वह देना बैंक में इस कार्य के ऐवज में तीन करोड़ रूपए की बैंक गारंटी वसूलने गए हैं। इसके लिए वह कागजी खानापूर्ति में लगे हुए हैं। श्री भार्गव ने बताया कि अनुबंध की शर्तों के अनुसार दो साल में वर्ष 2011 में दोशियान को सिंध का जल घर-घर सप्लाई करना था, लेकिन नौ साल बाद भी यह योजना दोशियान की लेटलतीफी के कारण पूर्ण नहीं हो सकी है। कार्य का स्तर भी बहुत ही घटिया है जिससे योजना में लगे पाइपों को बदलने के लिए दोबारा टेण्डर आमंत्रित करने पड़े। वहीं दोशियान महाप्रबंधक महेश मिश्रा ने स्वीकार किया कि नौ साल में भी यह योजना पूर्ण नहीं हुई जबकि दो साल में इसका क्रियान्वयन होना था, लेकिन इसके लिए उन्होंने दोशियान को दोषी न ठहराते हुए नगर पालिका को जिम्मेदार ठहराया है। श्री मिश्रा ने कहा कि नगर पालिका को दोशियान को टर्मिनेट करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि वह इस योजना के ठेकेदार नहीं, बल्कि नगर पालिका के भागीदार हैं। दोशियान ने अनुबंध की शर्तों का अक्षरश: पालन किया है। इस योजना में अनुबंध के अनुसार दोशियान को जितनी राशि व्यय करनी थी उससे 16 करोड़ रूपए अधिक दोशियान अभी तक खर्च कर चुकी है। टर्मिनेट करने के पहले नगर पालिका को उन्हें 16 करोड़ रूपए की राशि पहले ब्याज सहित देनी होगी। श्री मिश्रा ने कहा कि नगर पालिका पर यह जिम्मेदारी है कि वह कार्य पूर्ण करने के लिए सभी अनापत्तियां दोशियान को दे, लेकिन अभी भी नेशनल पार्क और नेशनल हाईवे की एनओसी नगर पालिका दोशियान को नहीं दे पाई है। ऐसे में कैसे उन्हें योजना में विलम्ब के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। अनुबंध के तहत दोशियान को शहर में 62 किमी लम्बी वितरण लाइन डालनी थी जबकि अभी तक दोशियान 52 किमी लम्बी वितरण लाइन डाल चुकी है। हालांकि श्री मिश्रा ने इस बात का जवाब नहीं दिया कि काम की खराब गुणवत्ता के कारण दोशियान जिम्मेदार क्यों नहीं है? श्री मिश्रा ने कहा कि वह अपने खिलाफ हो रहे अन्याय के विरोध में हाईकोर्ट की शरण लेंगे तथा जहां से उन्हें न्याय मिलेगा।
अध्यक्ष और सीएमओ के जाने से नपा का काम प्रभावित
पिछले तीन दिन से नगर पालिका से अध्यक्ष और सीएमओ के जाने से नगर पालिका का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बताया जाता है कि सीएमओ ने कनिष्ठ यंत्री रामवीर सिंह को चार्ज सौंपा है जबकि नगर पालिका में उनसे वरिष्ठ अधिकारी भी हैं। प्रभारी सीएमओ रामवीर सिंह निर्णय लेने में कानूनी रूप से सक्षम नहीं हैं जबकि नगर पालिका अध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह तो कभी चार्ज सौंपते ही नहीं है जबकि नियमानुसार उन्हें शहर से बाहर जाने पर नपा उपाध्यक्ष को कार्यभार सौंपना चाहिए था।






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