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पनामा कम्पनी की साख पर पनामा कर्मचारियों द्वारा ही लगाया जा रहा बट्टा | Kolaras ,Shivpuri News

 
बड़े व्यापारीयों ने खरीदा ईमान पनामा कम्पनी के कर्मचारियों का
सरकार को फिर से करोड़ों रुपयों का चूना लगाने की तैयारी

साइलो केंद्र पर किसानों की तौल बंद होते ही रात्रि में तुलाया जा रहा रसूखदारों का अमानक गेंहू

शिवपुरी कोलारस। विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बेंहटा भेड़ फार्म पर स्थित साईलो केंद्र पर आए दिन विवाद देखने को मिल रहे हैं। दलाल और रसूखदारों ने सायलो केन्द्र पर अपना कब्जा जमा लिया है। बड़े व्यापारियों ने अपने दलाल सक्रीय कर दिए हैं जो सायलो केन्द्र प्रभारी की मिली भगत से अपनी मनमर्जी मुताबिक माल तुला रहे है। जानकारी के मुताबिक रसूखदारों का खेल रात को शुरू होता है। जब किसानो की तौल बंद कर दी जाती है। तब रसूखदार अपनी मिट्टी मिली हुई ट्रॉलिया जहाँ से ट्रोली खाली होकर लौटती है वहाँ से लाकर इनके द्वारा सीधे काँटा कराया जाता है। खास बात ये भी है कि इन ट्रोलियों का सेम्पल नही लिया जाता है साथ ही ये सब कार्य दबंगो के संरक्षण मे किया जाता है जिससे किसान भी भयभीत है। किसान डर के साये मे गेँहू तुला रहे है। साइलो केन्द्र का संचालन करने वाली पनामा कंपनी के पास भंडारण तो पर्याप्त है लेकिन इसको भरने के लिए पनामा के कर्मचारियो द्वारा रसूखदारों से सांठ गाँठ करके ट्रॉलिंयो मे गेंहू के साथ मिट्टी भरकर तौल करके इनको किसानो के गेंहू के साथ मिक्स् कर साइलो बैग मे भरा जा रहा है आलम यह है कि सरकार को चूना लगाते हुए सरकारी मंशा को पलीता लगाने का काम किया जा रहा है। आसमान से आग बरस रही हैं किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर गेहूं बेचने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सैम्पल के नाम पर डेढ़ से दो किलो तक प्रति ट्रॉली निकाला जा रहा गेहूँ 
यहाँ कोई दस बीस ट्रॉली नहीं बल्कि अभी तक कई हजार ट्रॉली गेंहू सायलो केन्द्र पर पहुँच चुका है जिससे अभी तक कई हजार किलो गेंहू सैम्पल के नाम से अलग कर पनामा कम्पनी के कर्मचारीयों द्वारा किसानों को चुना लगाया जा रहा हैं। 
गड़बड़ कर किसानों लगा रहे चूना
सायलो केन्द्र के अतिरिक्त खरीद केंद्र जिन सुसायटीयों को बनाया गया है उनमें से अधिकांश डिफॉल्टर सुसायटियाँ हैं। जो पहले ही घोटाले कर चुके हैं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डिफॉल्टर सुसायटियों ने मोटी रकम रिश्वत रूप मे देकर फिर से खरीद केन्द्र हासिल करने में सफल हुए हैं। ऐसे में यह कह पाना मुश्किल है कि यह सब ईमानदारी  से कार्य करेंगें। साथ ही सरकारी महकमे के के उन आला अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लगता है जिन्होंने डिफॉल्टर सुसायटीयों को फिर से खरीद केन्द्र बनाया है। अगर निष्पक्ष जाँच की जाए तो इसमें आलाकमान अधिकारी से लेकर बड़े व्यापारी, सफेद पोश इन सबकी संलिप्तता इसमे उजागर हो सकती है।
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