
नींद इतनी गहरी थी कि उन्हें जनशिक्षा केंद्र प्रभारी के आने का आभास तक नहीं हुआ।
शिवपुरी। शिक्षा के मंदिर में पुस्तकों को भगवान का दर्जा दिया जाता है और उसी मंदिर में विद्या देने वाला शिक्षक ही जब इन पुस्तकों पर पैर रखकर खर्राटे भर रहा हो तो फिर यहां पढ़ने वाले बच्चों का भगवान ही मालिक है। नजारा शिवपुरी के कोलारस अनुविभाग में आने वाले जनशिक्षा केंद्र पचावली की प्राथमिक शाला आदिवासी बस्ती लुकवासा का है। जनशिक्षा केंद्र प्रभारी प्रदीप अवस्थी बाइक से यहां पहुंचे तो कक्ष में 14 बच्चे टाटपट्टी पर बैठे थे। उनके पास कुर्सी पर स्कूल के प्रभारी शिक्षक विष्णु जाटव दोनों पैर टेबल पर रखी पुस्तकों के ऊपर रखकर खर्राटे भर रहे थे। नींद इतनी गहरी थी कि उन्हें जनशिक्षा केंद्र प्रभारी के आने का आभास तक नहीं हुआ। करीब 5 मिनट तक वह वहां खड़े होकर देखते रहे, फोटो भी खींच लिए, लेकिन मास्टर साहब की नींद नहीं खुली। आवाज लगाई तब जाकर जागे। जवाब तलब किया तो मास्टर साहब का कहना था कि पैर में तकलीफ थी, इसलिए टेबल पर पैर रखकर झपकी लग गई थी। जनशिक्षा केंद्र प्रभारी ने पूरे प्रकरण का प्रस्ताव बनाकर कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दिया है।




