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भारत संस्कृति न्यास की परिचर्चा,सम्मेलन सम्पन्न

-संस्कृति को बचाना,व विकसित करना हमारा कार्य: तिवारी

शिवपुरी- सारा विश्व ही एक संस्कृति है,आस्थाओ के ठगों ने हमे बहुत ठगा है,इन ठगों से बचाने के लिए भारत संस्कृति न्यास का गठन किया।क्रांतियों से कुछ नही होता।कृष्ण के युग  बाद ढाई हजार साल तक देश मे कुछ गड़बड़ नही थी,गड़बड़ तो नए समाज को लेकर आये लोगो ने भारत मे प्रारम्भ की,उक्त उदगार वरिष्ठ पत्रकार लखनऊ व भारत संस्कृति न्यास के संस्थापक संजय तिवारी जी ने भारत संस्कृति न्यास परिचर्चा सम्मेलन में मुख्य अतिथि की आसंदी से व्यक्त किये।तिवारी ने कहा जो नया समाज बनाने आता है एक नया पंथ बनाकर चला जाता है।ज्ञान के नाम पर जो बाँट रहे है पढ़ा रहे है उससे आने वाली पीढ़ी के आगे अंधेरा ही अंधेरा है।इन विषयों को लेकर हम आगे आये है।सृष्टि के इस मूल को सामान्य लोगो तक पहुचा सके,ये कार्य हमे करना है।केवल कानून बना देने से समाज चलने लग जायेगा,ऐसा नही होता है जब तक कि कानून का  पालन हम नही करते है,सीखते है। सरकार चलाने के लिए संस्क्रति और संस्कार होना जरूरी है।अज्ञानता हमे मनुष्य की जगह दानव बना रही है। पांच मंजिला इमारत के फ्लैट तक सीमित रहने वाले किसी युवक से कल्पना करेंगे कि वह संस्कृति के रक्षण के लिए अपने रिश्तों के लिए कार्य कर पायेगा,तो क्या यह ठीक लगेगा क्या? संस्कृति की बात करने के लिए सभी खड़े हो जाते है उन विद्यालय के प्राध्यापकों से पूछो वह सांस्कृतिक आयोजन के नाम पर परोस क्या रहे है फूहड़ नृत्य,क्या उससे बच्चो में संस्कृति के प्रति लगाव या समझ बढ़ती है क्या?।जो चीज आपस मे मिल नही सकते उसे मिलाने की जबरदस्ती कोशिश क्यों कि जा रही है। वसुधैव कुटुम्बकम हम सभी को लेकर चलने वाले लोग है,हमारा किसी से झगड़ा नही है।राम ने कैसा जीवन जिया कितनी पीढ़ा उन्हें भोगनी पढ़ी क्या हमने नही सुना या पढ़ा।राम हमारे आराध्य है राम का त्याग राम का जीवन आदर्श है।ये जीवन हमे क्यो मिला है हम नही जानते लेकिन हमारी संस्कृति में वह ताक़त है कि हमारा जीवन क्यों है पता किया जा सकता है।समाज मे पहले किसी से किसी को डर नही होता था आज व्यक्ति को व्यक्ति से डर लग रहा है।संस्कृति को बचाने के लिए एक दीप जलाया है वह अवश्य सफल होगा।इस दीपक की लॉ दिवाकर बनके चमके।यही मेरी आशा हैहमरी संस्कृति विश्व पटल पर चमके यही हमारा लक्ष्य है।इस अवसर पर सिने अभिनेता अमित भार्गब ने कहा कि संस्कृति की रक्षा व उत्थान युवाओ के ही जिम्मे है,सभी को साथ मे लेकर भारत के नव निर्माण में अपनी भूमिका युवाओ को ही निभानी पड़ेगी।लेखिका व कवियित्री गीतिका वेदिका ने अपने उद्वोधन का प्रारम्भ संस्कृति पर लिखी कविता के साथ करते हुए कहा कि संस्कृति ही हमारी धरोहर है,संस्कृति के लिए कार्य करते हुए हम गौरवशाली गाथा को स्मरण करते हुए पुन: शसक्त भारत बना सकते है। इस कार्यक्रम का सफल संचालन अभिभाषक अजय जी गौतम,अतिथि परिचय दिवाकर शर्मा,प्रस्तावना प्रदीप अवस्थी व आभार प्रदर्शन विजय जी भार्गव ने किया।
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