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कमाई का जरिया बने हरिजन छात्रावास, छात्रों का लाखों का बजट डकार रहे अधीक्षक

मिलने वाली सुविधाओं से वंचित हैं छात्र

कोलारस। आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा अनु. जाति एवं अनु. जनजाति छात्रावासों का संचालन किया जाता है, लेकिन विभाग के कर्ताधर्ताओं की मिलीभगत से इन छात्रावास के अधीक्षक लाखों के बारे न्यारे करने में जुटे हुए हैं। ऐसा ही मामला कोलारस अनुविभाग में संचालित हरिजन छात्रावासों में देखने को मिल रहा है। छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं के लिए आने वाले बजट को अधीक्षक खुलेआम डकार रहे हैं। सूत्रों की मानें तो यह अधीक्षक विभाग के अधिकारियों को भी इसका एक हिस्सा पहुंचाते हैं तो विभाग के कर्ताधर्ता सबकुछ जानकर भी अनजान बने रहे हैं। 
विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो कोलारस में संचालित छात्रावास में अधीक्षक न तो निवास करते हैं और न ही दिनभर ड्यूटी पर भी रहते हैं। जिला मुख्यालय पर निवास करने वाले यह अधीक्षक मात्र अपनी हाजरी भरकर चलते बनते हैं। कोलारस अनुविभाग अंतर्गत अधिंकाश छात्रावासों में स्थिति बेहद खराब है। छात्रावास में कई पर  महिला अधीक्षकों को पदस्थ किया गया है कोलारस में कॉलेज रोड, जेल रोड, पुराने थाने के पास कृषि विभाग के पास स्थित छात्रावास नर्सरी में स्थित छात्रावास वहीं ग्रामीण अंचलो में तेंदुआ, खरई, सेसईसडक में छात्रावास संचालित है, परन्तु जिन उद्देश्योंं को लेकर सरकार ने छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है और लाखो रुपयों का बजट इन छात्रावासो को भेजा जा रहा है परन्तु कोलारस नगर से लेकर ग्रामीण अंचलो में संचालित हो रहे हरिजन छात्रावासों में रहने वाले हरिजन छात्रों को सुविधाएं नहीं मिल रही है और कहीं कहीं तो चौकीदार ही अधीक्षकगिरि का कार्य कर रहे हैं। हरिजन छात्रों से काम कराया जाता है पानी कि सुविधा नहीं होने से हरिजन छात्र पानी लाते है। मीनू अनुसार भोजन , नाशता नही दिया जा रहा है अधिकांश वार छात्रों द्वारा आला अधिकारीयों से शिकायते कि गई परन्तु अधीक्षकों पर वरिष्ठ अधिकारीयों द्वारा कार्यवाही नही की गई और छात्रावासो में कब तक प्रवेश लिया जाता है यह भी पता नहीं चलता है जिसके चलते आज भी अनेक हरिजन छात्र छात्रावासों में प्रवेश के लिये भटक रहे है।

छात्रावासों के पास भरा गंदा पानी 

हरिजन कल्याण विभाग द्वारा संचालित छात्रावास जिनमें बालक हरिजन छात्रावास जगतपुर, हरिजन कन्या छात्रावास कृषि विभाग के पास, छात्रावास में मैंन रास्ते पर ही बारिश का पानी भरा हुआ है, जिसके चलते यहां पर रह रहे छात्र-छात्राओं को बीमारी अपनी चपेट में ले सकती है, जबकि लाखों रूपये का बजट छात्रावासों के रख-रखाव के लिये आता है, परन्तु इस बजट का उपयोग अधीक्षक यहां नहीं करते और फर्जी कागजी कार्यवाही कर बजट से मिली राशि को हड़प कर जाते है।

कार्रवाई के नाम पर जूं तक नहीं रेंगते अधिकारियों के कानों में

यहां बता दें कि विगत दिवस शिवपुरी में संचालित सीनियर कन्या छात्रावास में 75 क्विंटल गेहूं भरे होने का मामला प्रकाश आया था, लेकिन कई दिन गुजरने के बाद भी विभाग कर्ताधर्ताओं के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। इसके बाद लोगों के जहन में सवाल उठते हैं कि क्या छात्रावास अधीक्षक बिना आदिम जाति कल्याण विभाग के कर्ताधर्ताओं से मिलकर यह गड़बड़ी कर सकते हैं? सूत्रों की मानें तो जिले में इस तरह के दर्जनों छात्रावास संचालित हो रहे हैं जिनमें केवल बच्चों के लिए आने वाला गेहूं सहित अन्य सामान फर्जी उपस्थिति दर्शाकर निकाल लिया जाता है। 
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