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किसान हितैषी योजनाओं एवं कृषकों की मेहनत से प्रदेश को मिला पांचवीं वार कृषि कमर्ण पुरस्कार- रूस्तम सिंह

गेहूं उत्पादन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पंजाब एवं हरियाणा से भी आगे

शिवपुरी-लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग मंत्री रूस्तम सिंह ने राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं एवं किसानों की लगन एवं मेहनत का परिणाम है कि देश में मध्यप्रदेश को गेहूं उत्पादन के क्षेत्र में पांचवी बार कृषि कमर्ण पुरस्कार से देश के राष्ट्रपति द्वारा नवाजा गया है। 
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री रूस्तम सिंह आज ग्राम स्वराज अभियान के तहत कृषि विभाग द्वारा नरवर में आयोजित कृषक संगोष्ठि को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठि में पूर्व विधायक रमेश खटीक, कलेक्टर तरूण राठी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेश जैन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल मौर्य, अनुविभागीय दण्डाधिकारी करैरा अंकित अष्ठाना, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुभाष जाटव, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष जण्डेल सिंह गुर्जर सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कृषकगण आदि उपस्थित थे।
रूस्तम सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार देश में ही नहीं विश्व में ऐसी पहली सरकार है, जिसने किसानों को गतवर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने पर उन्हें इस वर्ष 200 रूपए प्रति क्विंटल के मान से बोनस के रूप में राशि प्रदाय की जा रही है। इस वर्ष समर्थन मूल्य पर पंजीकृत किसानों से 2 हजार रूपए प्रति क्विंटल के मान से गेहूं की खरीदी की जा रही है। जिसमें 1735 रूपए समर्थन मूल्य और 265 रूपए प्रति क्विंटन बोनस प्रदाय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों को चना, मसूर एवं सरसों पर 100 रूपए प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है।
रूस्तम सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा है कि किसान की आमदनी 2022 तक दोगुनी हो, इसके लिए किसानों को वैज्ञानिकों की सलाह के साथ-साथ उन्नत एवं आधुनिक खेती के साथ-साथ फलोद्यान, पशुपालन, फूलों की खेती, मछलीपालन, रेशम पालन जैसी नकदी फसलों से भी जुडऩा होगा। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी के कारण भूमि का रकबा घट रहा है, इसके लिए हमें कम लागत एवं कम पानी की फसलें भी लेनी होंगी। इसके लिए हमें समय पर मृदा परीक्षण भी कराना होगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में उत्पादित गेहूं को समर्थन मूल्य पर खरीदकर गरीब परिवारों को एक रूपए प्रति किलों के मान से प्रदाय किया जा रहा है।
प्रदेश में 2003 में साढ़े 7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा थी, जो अब बढ़कर 80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा प्राप्त हो रही है। इसी प्रकार 2003 में गेहूं का उत्पादन 4 लाख मेट्रिक टन था, लेकिन राज्य सरकार की किसान हितैषी योजनाओं एवं किसान की मेहनत के कारण आज गेहूं उत्पादन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने आज हरियाणा, पंजाब राज्यों को पीछे छोड़ते हुए 1 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन किया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ऐसे किसान जिनके द्वारा 1 लाख तक का कृषि ऋण लिया गया है, वे किसान जिनके द्वारा समय पर किश्ते अदा की गई है, उन्हें 90 हजार की राशि ही वापस करनी होगी। उन्होंने कहा कि हमें वर्षा के जल को संरक्षण एवं सेजना होगा। इसके लिए हमें पुराने तालाबों के जीर्णोद्वार एवं मरम्मत कार्य के साथ-साथ ऐसी जलसंरचनाएं लेनी होगी। जिससे गांव का पानी गांव में और खेत का पानी खेत में ही रहे।
कार्यक्रम के शुरू में उपसंचालक कृषि आर.एस.शाक्यवार ने संगोष्ठि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार ग्राम स्वराज अभियान के तहत जिले के सभी विकासखण्ड मुख्यालय पर कृषि संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। इन संगोष्ठियो के माध्यम से कृषि वैज्ञानिक एवं कृषि अधिकारियों द्वारा वर्ष 2022 तक किसानों की यह आमदनी दोगुना कैसे हो, इसकी जानकारी दी जा रही है। कार्यक्रम के अंत में जनपद पंचायत नरवर के अध्यक्ष मुकेश खटीक ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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