
पेरेंट्स सतर्क रहें तभी सुरक्षित रह सकेंगे बच्चे, साथ ही बच्चों को भी करें सतर्क
शिवपुरी। वर्तमान में जिस तरह से मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएँ सामने आ रही हैं वह मानवता को झकझोरने वाली हैं। जिस तरह से तथाकथित दरिंदों द्वारा मासूमों को जिस तरह से अपनी हवस का शिकार बनाया जा रहा है उससे लोगों के सामने एक असमंजस की स्थिति निर्मित हो जाती है वह अपने बच्चों की सुरक्षा के प्रति किस पर भरोसा करें और किस पर नहीं। इस तरह के मामलों की पुलिस ने जाँच-पड़ताल की सामने आया कि अधिकतर मामलों में आरोपी या तो सगे-संबंधी या तो फिर पड़ोसी का लिप्त होना पाया गया है। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स का अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क होना अति आवश्यक है क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि लोगों का ध्यान करीबियों पर नहीं जाता और इसी का फायदा उठाकर वे हैवानियत कर रहे हैं।
शिवपुरी पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पिछले वर्ष जिले में दुष्कर्म के 86 केस दर्ज हुए जिस पर जब पुलिस द्वारा विवेचना उपरांत खुलासा हुआ तो पाया गया कि 31 केसों में आरोपी का पीडि़ता से कोई न कोई रिश्ता या संबंध है जबकि 42 केसों में पीडि़त बच्चियों के साथ पड़ोसियों ने ही अपनी हवस का शिकार बनाया गया। जबकि 5 प्रकरणों में पीडि़ता के सहपाठी या सहकर्मी आरोपी निकले। यह मामले पुलिस द्वारा दर्ज किए गए केसों में जाँच के उपरांत सामने आए हैं। जब भी किसी मासूम बालिका के साथ कोई हैवानियत होती है तो हर अभिभावक अंदर तक हिल जाता है क्योंकि उनके घर भी मासूम बच्चियाँ हैं, लेकिन पुलिस ने जो आँकड़े इकट्ठा किए हैं उसे देखकर तो यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों को बाहर के या अन्य किसी अपरिचित से अधिक तो नजदीकियों व पड़ोसियों से अपने बच्चों को अधिक खतरा है और उन्हीं से बच्चों को सुरक्षित रखने की जरूरत है। क्योंकि किसी के मन में क्या पाप छुपा है यह मासूम बच्चे समझ नहीं आते और आसानी से उनके शिकार बन जाते हैं।
कुछ जरूरी सावधानियाँ बरतने की आवश्यकता
आज के समय में कौन सा इंसान अच्छा है और किस इंसान के मन में गन्दगी भरी है इसका अनुमान लगाना बिल्कुल भी असम्भव है। आपके साथ कब और कौन धोखा कर जाए आप समझ नहीं सकते है इसलिए दुष्कर्म की घटनाएं न हों इसके लिए लड़कियों और उनके परिवार को कुछ सावधानियाँ जरूर बरतनी चाहिए । आपकी छोटी छोटी सावधानियाँ आपको किसी बड़े खतरे से बचा सकती है जैसे-
1)घर वालों को चाहिए कि अपनी बेटी के सभी कन्टेक्ट्स की जानकारी रखें ताकि अगर कभी बच्ची को घर आने में लेट हो या बच्ची का फोन न लगे तो उसके दोस्तों से जानकारी हासिल की जा सके।
2) हर लडकी को चाहिए कि अपने घर के किसी सदस्य, किसी विश्वसनीय दोस्त और महिला हेल्पलाइन नम्बर 1090 को अपने फोन के स्पीड डायल मोड में सेट करके रखें जिससे जब भी आप मुसीबत में हों आपको नम्बर खोजने की जरूरत न पडे और तुरन्त काल कनेक्ट हो जाए।
3)अगर आपको लगता है कि कोई आपको हर रोज गलत निगाह से देखता है या रास्ते में आपका पीछा करता है तो इस बात को बिल्कुल भी इग्नोर न करें और तुरन्त अपने घर वालों को बताएं या महिला हेल्पलाइन नम्बर पर शिकायत दर्ज कराएं।
4)अगर आप किसी आफिस में काम करती हैं तो कोशिश करें की समय रहते घर आ जाएं फिर भी अगर कभी रात में लेट हो जाए तो घर से किसी न किसी को अवश्य बुला ले या किसी विश्वसनीय दोस्त को कॉल कर लें।
5) गांव और देहात के लोगों से मेरी प्रार्थना है कि अपने घर शौचालय का निर्माण जरूर कराएं और अगर पहले से बना है तो घर की औरतों और लड़कियों को उसका इस्तेमाल करने को कहें क्योंकि ग्रामीण इलाकों में जो दुष्कर्म होते हैं अक्सर तभी होते हैं जब महिलाएं शौच के लिए रात में बाहर गई होती हैं।
6) अगर आप कहीं सफर से अकेली आ रही है तो हमेशा सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करिए किसी भी अन्जान व्यक्ति की बाइक या कार का इस्तेमाल न कीजिए।
7)अपनी बेटी को किसी अन्जान इंसान के साथ स्कूल या किसी रिश्तेदार के घर न भेजें।
8)माँ बाप को चाहिए कि अगर उनकी बच्ची उनसे कुछ कहना चाह रही हो या किसी के बैड टच की शिकायत करना चाहती हो तो उसे डाटने के बजाय उसको सुनें और समझने की कोशिश करें।
9)अगर कोई इंसान या आपका क्लोज फ्रेन्ड्स आपसे कुछ गलत या अश्लील टापिक पर बात करता है जो आपको पसन्द नही है तो उसे तुरन्त टोकें और रोकें। अगर आप नही रोकेंगी तो वो इसे आपकी सहमति समझेगा और उसकी हिम्मत बढती जाएगी।
10)अगर कोई ऐसा इंसान जिसे आप पूरी तरह से जानती नही हैं या आपको उस पर पूरी तरह से भरोसा नही है,किसी अन्जान जगह या होटल में बुलाए तो बिल्कुल भी न जाएं या कोई न कोई बहाना बना दें।
इनका कहना है

पिछले वर्ष दर्ज कुल 86 प्रकरणों में से 31 में रिश्तेदार संबंधी, 42 में पड़ोसी व 5 केस में सहकर्मी/सहपाठी आरोपी रहे हैं इसलिए अभिभावक जागरूक रहें तथा जिन पर वे भरोसा नहीं कर सकते, उनके सहारे अपने मासूम बच्चों को न छोड़ें। साथ ही बच्चों को भी समझाएं कि यदि कोई गलत हरकत करे, तो उसके बारे में तत्कल माता-पिता को बताएं।






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